कर्रा में कोयले की धूल अब सिर्फ हवा को ही नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित कर रही है। बिलासपुर जिले के कर्रा, लिमतरा, गतौरा और फरहदा के ग्रामीणों का कहना है कि कोयले की धूल की वजह से सांस लेना मुश्किल हो गया है, फसलों पर कालिख जम रही है और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की सेहत पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में हिन्द एनर्जी के कोल वाशरी प्लांट के प्रस्तावित विस्तार ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
गतौरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करने वाले यात्रियों को हर कुछ मिनट में मुंह ढंकने की मजबूरी होती है। हवा में उड़ती काली धूल प्लेटफॉर्म से लेकर आसपास के इलाकों तक फैल जाती है। स्टेशन के पास मौजूद जेके कॉलेज के छात्रों का भी यही हाल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफेद यूनिफॉर्म पहनकर स्कूल या कॉलेज जाने वाले बच्चों के कपड़े शाम तक धूल से स्लेटी हो जाते हैं
ग्रामीणों का आरोप है कि कोयले की धूल का असर सिर्फ लोगों की सेहत तक सीमित नहीं है। खेतों में धान और सब्जियों की फसलों पर लगातार डस्ट की परत जम रही है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आई है। किसानों का दावा है कि कई जगह पैदावार में करीब 40 प्रतिशत तक कमी देखने को मिल रही है। वहीं गांवों में दमा, टीबी और सांस से जुड़ी दूसरी बीमारियों के मरीज भी बढ़ रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों और बुजुर्गों को झेलनी पड़ रही है।
अब इसी इलाके में हिन्द एनर्जी अपने कोल वाशरी प्लांट का विस्तार करने की तैयारी कर रही है। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इस विस्तार के लिए होने वाली अनिवार्य जनसुनवाई की जानकारी सही तरीके से लोगों तक नहीं पहुंचाई जा रही। उनका कहना है कि पंचायत भवन पर केवल एक सूचना चस्पा कर औपचारिकता पूरी कर दी गई, जबकि अधिकांश ग्रामीणों को जनसुनवाई की तारीख और प्रक्रिया की जानकारी ही नहीं है।


