छत्तीसगढ़ में 17 हजार डॉक्टर पंजीकृत, फिर भी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में कई पद रिक्त
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छत्तीसगढ़ में 17 हजार डॉक्टर पंजीकृत, फिर भी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में कई पद रिक्त

 



रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति एक बार फिर बहस का विषय बन गई है। राज्य में 17 हजार से अधिक पंजीकृत डॉक्टर उपलब्ध होने के बावजूद सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों, विशेषज्ञों और चिकित्सा शिक्षकों के हजारों पद खाली पड़े हैं। इस स्थिति को लेकर छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने मुख्य सचिव को विस्तृत पत्र भेजकर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।



सिविल सोसाइटी द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के कई सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रहे हैं। इसका असर केवल मरीजों के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और प्रशिक्षण भी प्रभावित हो रहा है। कई संस्थानों में आधे से अधिक पद लंबे समय से रिक्त हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में हर वर्ष लगभग 2250 छात्र MBBS की पढ़ाई पूरी करते हैं, लेकिन उनके लिए स्नातकोत्तर यानी PG की सीटें बेहद सीमित हैं। दूसरी ओर, नियमित भर्तियों की कमी और कम मानदेय जैसी समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में डॉक्टर सरकारी सेवाओं से दूरी बना रहे हैं।


विशेषज्ञ डॉक्टरों की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। प्रदेश में विशेषज्ञों के स्वीकृत पदों का बड़ा हिस्सा खाली है, जबकि कई दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में आवश्यक चिकित्सा सेवाएं लगभग नदारद हैं। सीनियर रेजिडेंट, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी बड़ी संख्या में रिक्तियां मौजूद हैं।


सिविल सोसाइटी ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि छत्तीसगढ़ में आज तक सरकारी क्षेत्र में किडनी, लीवर और हार्ट ट्रांसप्लांट जैसी सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं शुरू नहीं हो पाई हैं। इसके कारण गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है।


संगठन का कहना है कि समस्या डॉक्टरों की उपलब्धता की नहीं, बल्कि नियमित भर्ती प्रक्रिया के अभाव की है। छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में हजारों योग्य डॉक्टर पंजीकृत हैं, लेकिन वर्ष 2020 के बाद से नियमित भर्ती नहीं होने के कारण सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्त पद लगातार बढ़ते जा रहे हैं।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते रिक्त पदों को नहीं भरा गया और मेडिकल कॉलेजों की आधारभूत सुविधाओं में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और बढ़ सकता है। इसी को देखते हुए सिविल सोसाइटी ने नियमित भर्ती, बेहतर मानदेय, मेडिकल कॉलेजों के सुदृढ़ीकरण और स्वास्थ्य बजट में वृद्धि कीमांग की है।

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