याचिकाकर्ता हनुमान प्रसाद की भूमि ग्राम रायपुरा में स्थित थी.उनकी भूमि पर आरडीए द्वारा अपने आवासीय योजना के निर्माण के दौरान याचिकाकर्ता की भूमि पर सड़क निर्माण कर दिया गया। आपत्ति करने पर स्थानीय प्रशासन एवं आरडीए द्वारा स्थल निरीक्षण एवं सीमांकन कार्य किया गया ।जांच उपरांत भूमि पर सड़क निर्माण होना पाया गया किंतु मुआवज़ा प्रदान नहीं किया गया। इसके विरुद्ध याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता सुशोभित सिंह के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की ।याचिका में बताया गया कि बगैर अनुमति एवं मुआवजा भुगतान किए बिना भूमि अधिग्रहण नागरिक के भारत के संविधान अनुच्छेद ३००a का उल्लंघन है तथा याचिकाकर्ता को विधि अनुसार मुआवजा प्रदान किया जाए ।उच्च न्यायालय ने याचिका पर संज्ञान लेते हुए आरडीए तथा स्थानीय प्रशासन को पुनः सीमांकन करने का निर्देश दिया तथा यह आदेश दिया कि यदि उक्त कार्यवाही में याचिकाकर्ता की भूमि पर सड़क निर्माण होना पाया जाता है तो याचिकाकर्ता की भूमि पर विधिसम्मत अधिग्रहण कारवाही की जाए और समुचित मुआवजा प्रदान किया जाए।

