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छत्तीसगढ़ के विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश





बिलासपुर। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देशित किया कि उपयुक्त पाए जाने वाले उम्मीदवारों को रिक्त पदों पर नियुक्त करने की प्रक्रिया यथासंभव दो माह के भीतर पूर्ण की जाए। की गई कार्रवाई की रिपोर्ट जुलाई 2026 में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन एवं 85 विशेष शिक्षकों के मामलों पर निर्णय एवं पात्र उम्मीदवारों की नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात राज्य शासन शेष रिक्त पदों को भरने हेतु नई भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने के लिए स्वतंत्र होगा।

राज्य शासन ने दिए आंकड़े

सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष राज्य शासन द्वारा प्रस्तुत शपथपत्र में बताया गया कि राज्य में विशेष शिक्षकों के कुल 848 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 100 पदों के लिए 3 अक्टूबर 2025 को विज्ञापन जारी किया गया था। उक्त भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत भारतीय पुनर्वास परिषद द्वारा निर्धारित योग्यता रखने वाले 62 शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है। जबकि शेष 38 पद शिक्षक पात्रता परीक्षा संबंधी विषय के कारण अब तक रिक्त हैं। रजनीश कुमार पांडेय एवं अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता कौस्तुभ शुक्ला, पलाश तिवारी ने पैरवी की।

निर्धारित योग्यता वालों को दें नियुक्ति

याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि वर्तमान में प्राथमिक स्तर पर 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन संविदा आधार पर कार्यरत हैं तथा माध्यमिक स्तर पर 85 विशेष शिक्षक निश्चित मानदेय पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन सभी 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन एवं 85 विशेष शिक्षकों को उनके समस्त शैक्षणिक एवं व्यावसायिक अभिलेखों सहित स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष प्रस्तुत होने का अवसर प्रदान किया जाए। यदि वे निर्धारित योग्यता एवं अन्य आवश्यक पात्रताओं को पूर्ण करते हैं, तो उनकी नियुक्ति पर विधिसम्मत विचार किया जाए।

छत्तीसगढ़ में 49 हजार से अधिक विशेष बच्चे, 3981 शिक्षक जरूरी

अपने आदेश में न्यायालय ने यह महत्वपूर्ण तथ्य भी दर्ज किया कि छत्तीसगढ़ राज्य में 49,000 से अधिक विशेष आवश्यकता वाले बच्चे हैं तथा राज्य में लगभग 3981 विशेष शिक्षकों की आवश्यकता है। न्यायालय ने समावेशी शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

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