बता दें कि रायपुर निवासी सतपाल सिह छाबड़ा को एसीबी और ईओडब्ल्यू ने डीएमएफ घोटाला एवं मनीलॉड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। सतपाल सिंह ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। ईडी एवं ईओडब्ल्यू के अनुसार उसने खरीदी और आपूर्ति से जुड़ी गड़बड़ियों में एक मुख्य बिचौलिया और कमीशन एजेंट के तौर पर काम किया है। याचिकाकर्ता सतपाल सिह छाबड़ा ने डीएमएफ से जुड़ी कृषि संबंधी योजनाओं के तहत खरीद और आपूर्ति से संबंधित कथित अनियमितताओं में एक प्रमुख मध्यस्थ और कमीशन एजेंट के रूप में कार्य किया है। जांच के दौरान छाबड़ा ने स्वीकार किया है, 2019 से वह कृषि विभाग में आपूर्ति कार्यों को सुविधाजनक बनाने में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं, उससे मंदीप चावला उर्फ मैडी ने संपर्क किया था, जिसने पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा के प्रभाव से विभागीय काम हासिल करने का प्रस्ताव दिया था।
सप्लाई आदेशों के लिए लिया कमीशन
याचिकाकर्ता पर आरोप है उसने रेट कॉन्ट्रैक्ट आरसी विक्रेताओं को कृषि और बागवानी जैसे विभागों से जोड़ने वाले एजेंट के रूप में काम किया। कमीशन के बदले आपूर्ति आदेशों को सुविधाजनक बनाया। विक्रेताओं से 30 से 35 प्रतिशत कमीशन लिया गया। 10 प्रतिशत ऊपर भेजा गया और बाकी 20 प्रतिशत से 25 प्रतिशत सतपाल सिह छाबड़ा और मंदीप चावला के बीच बंटा हुआ था। हालांकि रेट कांट्रैक्ट टेंडर प्रक्रिया के तहत दिया था, लेकिन काम का बंटवारा एजेंटों के जरिए किया गया था। वेंडर्स को भी कमीशन देने के लिए मजबूर किया गया था। कमीशन देने के एवज में ही काम दिया जा रहा था।


