छत्तीसगढ़ के खेल एवं युवा कल्याण विभाग में खेल सामग्री की खरीदी और विभिन्न भुगतानों में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला द्वारा सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, विभाग पर आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया से बचने के लिए एक ही तरह की खेल सामग्री को एकमुश्त खरीदने के बजाय जानबूझकर छोटे-छोटे बिलों में बांटा गया, जिनमें से कई बिल तीन लाख रुपये की निर्धारित सीमा के ठीक आसपास बनाए गए।
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दस्तावेजों के मुताबिक, 30 अगस्त 2024 को जूडो, खो-खो और कबड्डी मैट की खरीदी के लिए तीन लाख से कम के अलग-अलग बिल दर्शाए गए, जबकि बाद में 1 अक्टूबर को भी भारी रकम की सामग्री खरीदी गई। इसके अलावा, मल्टी जिम और 18 अक्टूबर को दर्ज 18.37 लाख रुपये की खेल सामग्री तथा 29.94 लाख रुपये की वेटलिफ्टिंग सामग्री की खरीद में दर निर्धारण, CSIDC मानकों और तकनीकी गुणवत्ता की अनदेखी के सवाल खड़े किए गए हैं।
मामले में सबसे गंभीर सवाल टेंडर और कोटेशन दस्तावेजों के बिना किए गए भारी भुगतानों को लेकर उठाए गए हैं। दस्तावेजों के अनुसार, 10 मार्च 2025 को रायपुर के तंदूर क्लब को लगभग 6.52 लाख रुपये, 19 मार्च को रायपुर, बिलासपुर और राजनांदगांव में हॉकी टर्फ की सफाई के लिए 15.45 लाख रुपये तथा 23 मार्च 2025 को दो भुगतानों के जरिए करीब 1.50 करोड़ रुपये (61.33 लाख और 88.47 लाख रुपये) का भुगतान किया गया, लेकिन इनके टेंडर व कोटेशन संबंधी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। वहीं अल्पना फिटनेस जोन और जाला राम इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से की गई खरीदियों के विभागीय आदेशों और कोषालय भुगतानों में भी अंतर देखा गया है। आरटीआई एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला ने पूरे मामले की स्वतंत्र वित्तीय एवं तकनीकी जांच (ऑडिट) कराने और भौतिक सत्यापन के साथ जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

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