रायपुर से लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों तक इन दिनों छत्तीसगढ़ की राजनीति को लेकर जबरदस्त सुगबुगाहट देखने को मिल रही है। राज्य के राजनीतिक हलकों में अफवाहों और कयासों का बाजार बेहद गर्म है, जहाँ हर रोज नए राजनीतिक समीकरणों पर चर्चाएं हो रही हैं। जब भी किसी राज्य में प्रशासनिक या संगठनात्मक उथल-पुथल की स्थिति बनती है, तो इस तरह की आशंकओं को और अधिक बल मिलने लगता है। फिलहाल छत्तीसगढ़ में भी कुछ ऐसा ही माहौल बना हुआ है, जहाँ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंत्रिमंडल में जल्द ही बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। यह चर्चा न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच जोर पकड़ रही है, बल्कि मीडिया में भी इसे लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं।
इस बार मंत्रिमंडल विस्तार और बदलाव की खबरों को बल मिलने की मुख्य वजह प्रदेश भारतीय जनता पार्टी संगठन में संभावित फेरबदल माना जा रहा है। सियासी जानकारों का कहना है कि सिर्फ राज्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि केंद्र में मोदी मंत्रिमंडल में होने वाले भावी फेरबदल के तार भी छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़े हुए हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में होने वाले संभावित बदलावों का सीधा असर छत्तीसगढ़ से आने वाले नेताओं पर पड़ सकता है।
इन तमाम चर्चाओं के केंद्र में इस वक्त केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू का नाम प्रमुखता से आ रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह दावा किया जा रहा है कि मोदी कैबिनेट से तोखन साहू की छुट्टी हो सकती है और उन्हें वापस राज्य की राजनीति में सक्रिय किया जा सकता है। माना जा रहा है कि केंद्रीय पद से इस्तीफा दिलाकर उन्हें छत्तीसगढ़ में प्रदेश भाजपा संगठन की कमान सौंपी जा सकती है। यदि ऐसा होता है, तो उनकी जगह केंद्र में छत्तीसगढ़ के किसी अन्य वरिष्ठ सांसद को मौका दिया जा सकता है, जिससे राज्य में नए क्षेत्रीय और जातीय समीकरण देखने को मिल सकते हैं।


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