रायपुर. केंद्रीय जीएसटी विभाग की तरफ से कारोबारियों और ठेकेदारों के खिलाफ शिकंजा कसने का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में विभाग की टीम ने एक ठेकेदार के ठिकानों पर दबिश देकर वित्तीय रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, इस पूरी कार्रवाई का मुख्य संबंध वर्ष 2021 के जीएसटी लेन-देन और टैक्स रिकॉर्ड से बताया जा रहा है, जिसमें भारी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विभाग को ठेकेदार के जीएसटी रिकॉर्ड की स्क्रूटनी के दौरान इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से संबंधित राशि संदिग्ध और सामान्य से अधिक पाए जाने की जानकारी मिली थी। इसी इनपुट के आधार पर केंद्रीय जीएसटी की टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित सभी व्यावसायिक रिकॉर्ड्स को अपनी जांच के दायरे में ले लिया। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने ठेकेदार से जुड़े तमाम कारोबारी दस्तावेजों, बैंक विवरण और जीएसटी रिटर्न के आंकड़ों को आमने-सामने रखकर बारीकी से परखा।
मौके पर मौजूद दस्तावेजों और बिलों का मिलान जीएसटी पोर्टल पर दर्ज रिकॉर्ड से किया जा रहा है। विभाग मुख्य रूप से इस बात की तकनीकी और कागजी जांच कर रहा है कि किताबों में दर्ज किए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट और वास्तविक कारोबारी लेन-देन के बीच किसी प्रकार का भारी अंतर या हेरफेर तो नहीं किया गया है। चूंकि जांच का दायरा साल 2021 के वित्तीय लेन-देन तक फैला हुआ है, इसलिए उस अवधि के सभी बिलों, इनपुट टैक्स और सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स की एक-एक प्रविष्टि की पड़ताल की जा रही है।
हालांकि, विभाग की यह कार्रवाई अभी शुरुआती दौर में है और दस्तावेजों का परीक्षण लगातार जारी है, इसलिए मामले में वास्तविक कर देनदारी या किसी भी प्रकार की कथित वित्तीय अनियमितता की आधिकारिक राशि फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है। केंद्रीय जीएसटी विभाग की टीम दस्तावेजों की पूरी जांच और डेटा मिलान के बाद ही यह तस्वीर साफ करेगी कि इनपुट टैक्स क्रेडिट में असल में कितना अंतर या विसंगति पाई गई है। इस कार्रवाई के बाद से स्थानीय व्यावसायिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है और जांच पूरी होने के बाद विभाग आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई तय करेगा।


