**कोरबा:** प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट और केंद्र सरकार की बेहद महत्वाकांक्षी 'प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण' में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। कोरबा जिले के तिलकेजा ग्राम पंचायत में हुआ यह घोटाला अब केवल पंचायत स्तर की छोटी-मोटी गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि जिला स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं।
इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पंचायत सचिव को निलंबित कर दिया गया है, जबकि 4 संविदाकर्मियों की सेवाएं समाप्त कर उनके खिलाफ उरगा थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा दी गई है। जिला स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, तिलकेजा पंचायत में योजना के तहत गंभीर वित्तीय अनियमितताएं और बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप पूरी तरह सिद्ध पाए गए हैं। रिपोर्ट में मुख्य रूप से यह खुलासा हुआ है कि नियमों को ताक पर रखकर 48 ऐसे अपात्र हितग्राहियों के नाम पर आवास स्वीकृत कर दिए गए, जो वास्तव में इस योजना के हकदार ही नहीं थे। इसके अलावा, योजना के तहत मिलने वाली निर्माण राशि को वास्तविक हितग्राहियों के बजाय दूसरे परिवारों या अन्य व्यक्तियों के बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया गया। हद तो तब हो गई जब उन लोगों के नाम पर भी आवास की किस्तें जारी कर दी गईं, जिनकी पहले ही मौत हो चुकी थी और उनके नाम पर आई राशि का भी धड़ल्ले से आहरण कर लिया गया। इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद जिला पंचायत प्रशासन हरकत में आया और तुरंत सख्त कदम उठाते हुए उरगा थाने में आधिकारिक रूप से एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस ने भी प्रकरण दर्ज कर मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से ग्रामीण इलाकों के प्रशासनिक हल्कों में हड़कंप मच गया है और सरकारी योजनाओं में सेंध लगाने वालों के बीच डर का माहौल है।


