बिलासपुर. अपोलो अस्पताल से जुड़े कथित फर्जी डॉक्टर प्रकरण में पुलिस की विवेचना को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामले में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को ज्ञापन सौंपकर अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। वहीं, कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने भी विवेचना की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मामले की स्वतंत्र जांच की आवश्यकता बताई है।
मामला उस कथित फर्जी डॉक्टर से जुड़ा है, जिस पर अस्पताल में उपचार के दौरान कई मरीजों के इलाज से संबंधित गंभीर आरोप लगे थे। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि किसी चिकित्सक की नियुक्ति में दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया में लापरवाही हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि केवल संबंधित व्यक्ति ही नहीं, बल्कि नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही की भी जांच होना आवश्यक है ताकि पूरे मामले के सभी तथ्य सामने आ सकें।
इधर, हाईकोर्ट के अधिवक्ता विनय दुबे ने भी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर विवेचना की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की आवश्यकता बताई है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हो तो मामले की जांच एसआईटी या अन्य सक्षम एजेंसी से कराई जा सकती है।
इस बीच पुलिस की ओर से जारी जानकारी में कहा गया है कि जांच उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी पक्ष के पास नए तथ्य या साक्ष्य हैं, तो वे उन्हें जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं, जिन पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।
गौरतलब है कि यह मामला पहले से ही चर्चा में रहा है और इससे जुड़े विभिन्न पक्ष समय-समय पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं सामने रखते रहे हैं। फिलहाल कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच की मांग दोहराते हुए कहा है कि यदि मामले में संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है, तो आगे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन पर
विचार किया जाएगा।

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