*बिलासपुर . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान दिए गए बयानों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। बिलासपुर के कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित बौद्धिक वर्ग के दौरान संघ प्रमुख ने उन स्वयंसेवकों को साफ शब्दों में आईना दिखाया है, जो संगठन से जुड़कर राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पूरी करने या टिकट पाने की आस रखते हैं।
### 1. राजनीतिक लाभ का जरिया नहीं है संघ
अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान डॉ. भागवत ने कड़े शब्दों में कहा कि संघ की सदस्यता का अर्थ भारतीय जनता पार्टी या किसी अन्य राजनीतिक दल में टिकट की मांग करना कतई नहीं है। उन्होंने चेताया कि स्वयंसेवक होना किसी भी प्रकार के राजनीतिक लाभ या सत्ता प्राप्ति का शॉर्टकट नहीं बनना चाहिए। एक सच्चे स्वयंसेवक की असली पहचान उसका अनुशासित आचरण, समाज सेवा और कर्तव्यनिष्ठा होती है।
### 2. भाजपा और संघ की कार्यप्रणाली पर स्पष्ट बात
आरएसएस और बीजेपी के रिश्तों पर खुलकर बात करते हुए संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि भाजपा एक स्वतंत्र राजनीतिक दल है जो अपने राजनीतिक एजेंडे के तहत कार्य करती है। भले ही पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता पृष्ठभूमि से स्वयंसेवक रहे हों, लेकिन संघ से अपने जुड़ाव को कभी भी अवसरवाद या राजनीतिक सीढ़ी के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
### 3. छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ रहा संघ का नेटवर्क
बौद्धिक सत्र के दौरान छत्तीसगढ़ में संघ के सांगठनिक विस्तार के आंकड़ों की भी समीक्षा की गई। डॉ. भागवत ने संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि प्रदेश में शाखाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है और अब इसमें 2,400 नए स्थान और जुड़ चुके हैं। राज्य के दूर-दराज के इलाकों तक शाखाओं की पहुंच को सुनिश्चित करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
### 4. संवाद और संपर्क का अचूक सूत्र
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने समाज के हर वर्ग तक पहुंचने का एक सरल मंत्र साझा किया। उन्होंने कहा कि हर स्वयंसेवक को अपने जीवन में **'अपरिचित को परिचित, परिचित को मित्र और मित्र को सजग स्वयंसेवक'** बनाने की इस त्रिविध प्रक्रिया को अपनाना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य केवल संख्या बल बढ़ाना नहीं, बल्कि समाज में आपसी विश्वास और आत्मीयता की मजबूत डोर तैयार करना है।
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