Bilaspur News. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर से एक बेहद झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। शहर के चर्चित चिल्ड्रन हॉस्पिटल 'शिशु भवन' में ड्रेसिंग के दौरान एक नवजात शिशु का अंगूठा कटने का गंभीर मामला सामने आया है। घटना के बाद से पीड़ित परिवार सदमे में है, वहीं अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। मीडिया में मामला तूल पकड़ने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच टीम का गठन कर दिया है।
## 13 साल के इंतजार की खुशियां बदलीं मातम में
मिली जानकारी के अनुसार, बिलासपुर के एक प्रतिष्ठित कारोबारी दंपती के यहां शादी के पूरे 13 साल के लंबे इंतजार के बाद किलकारी गूंजी थी। घर में बच्चे के जन्म से चारों तरफ खुशियों का माहौल था, लेकिन अस्पताल की कथित लापरवाही ने इस खुशी को सदमे और आंसुओं में बदल दिया।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ की भारी लापरवाही के कारण नवजात शिशु की ड्रेसिंग करते समय उसका अंगूठा ही काट दिया गया। घटना के तुरंत बाद जब परिजनों ने हंगामा किया, तो अस्पताल प्रबंधन ने मामले को दबाने की कोशिश की और मौखिक आश्वासन देकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया। हालांकि, किसी तरह यह खबर मीडिया तक पहुंच गई, जिसके बाद पूरा सच सामने आया।
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## निजी अस्पतालों की मनमानी और स्थानीय स्वास्थ्य महकमे की चुप्पी
इस घटना के बाद शहर के निजी अस्पतालों की मनमानी और लापरवाही का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के कई प्राइवेट अस्पतालों में लगातार इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं—चाहे वह इलाज में लापरवाही हो, मनमाने तरीके से भारी-भरकम बिलिंग करना हो या फिर शवों को बंधक बनाने जैसी अमानवीय घटनाएं हों।
लेकिन सबसे बड़ी विडंबना यह है कि स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे के पास इन मनमानियों का कोई ठोस उपचार या प्रभावी नियंत्रण नहीं है, जिससे निजी अस्पतालों के हौसले बुलंद हैं।
## अस्पताल प्रबंधन ने झाड़ा पल्ला, नर्सिंग स्टाफ हटाया गया
मामला तूल पकड़ने और सीएमएचओ द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया है। प्रबंधन ने आरोपी संबंधित नर्सिंग स्टाफ को ड्यूटी से हटा दिया है। साथ ही, बच्चे की प्लास्टिक सर्जरी और उसके संपूर्ण इलाज का खर्च उठाने की जिम्मेदारी अब अस्पताल प्रबंधन ने ली है।

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