झीरम घाटी हत्याकांड: NIA कोर्ट के फैसले पर भूपेश बघेल ने उठाए सवाल, कहा– ‘मिला अधूरा न्याय’

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झीरम घाटी हत्याकांड: NIA कोर्ट के फैसले पर भूपेश बघेल ने उठाए सवाल, कहा– ‘मिला अधूरा न्याय’



छत्तीसगढ़ के चर्चित और दिल दहला देने वाले झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। अदालत ने इस मामले में 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है, जबकि सजा का ऐलान 16 सितंबर को किया जाएगा। इस बड़े अदालती फैसले के तुरंत बाद प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने कोर्ट के निर्णय पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे पीड़ित परिवारों के साथ अधूरा न्याय करार दिया है।




एनआईए की विशेष अदालत ने झीरम घाटी हमले में शामिल 10 आरोपियों को वारदात की साजिश रचने और उसे अंजाम देने का दोषी माना है। अदालत द्वारा सभी दोषियों को 16 सितंबर को सजा सुनाई जाएगी, जिसे कानूनी प्रक्रिया के तहत एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस पार्टी इस निर्णय से पूरी तरह असंतुष्ट नजर आ रहे हैं। उनका मानना है कि जब तक इस बड़े नरसंहार के पीछे छिपे मुख्य साजिशकर्ताओं का पर्दाफाश नहीं होता, तब तक इसे पूर्ण न्याय नहीं कहा जा सकता।



भूपेश बघेल ने एनआईए की जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जांच एजेंसी केवल निचले स्तर के हमलावरों और कैडरों तक ही सीमित रह गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस भयावह हमले के पीछे की मुख्य राजनीतिक साजिश और मास्टरमाइंड को बेनकाब करने में एनआईए पूरी तरह विफल रही है। बघेल के अनुसार, जिस गहराई से इस मामले की साजिश की परतें खोली जानी चाहिए थीं, वह नहीं हो सका और इसी वजह से कोर्ट का यह फैसला पीड़ित परिवारों को अधूरा न्याय प्रदान करता है।


यह मामला 25 मई 2013 का है, जब बस्तर की झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस की 'परिवर्तन यात्रा' के काफिले पर घात लगाकर भीषण हमला कर दिया था। इस बर्बर हमले में पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, 'सलवा जुडूम' के संस्थापक महेंद्र कर्मा और पूर्व विधायक उदय मुदलियार सहित छत्तीसगढ़ कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ कुल 29 लोगों की जान चली गई थी। 16 सितंबर को अदालत द्वारा सजा का ऐलान किए जाने के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की पूरी संभावना है।

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