बिलासपुर | 16 अगस्त 2026. खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने शहर में जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले प्रतिष्ठानों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पुराना हाईकोर्ट के सामने स्थित प्रसिद्ध **'मद्रासी होटल' (मद्रासी रेस्टोरेंट)** का खाद्य लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को रसोई और भंडारण में भारी कमियाँ मिलीं। गंदगी से पटे फ्रिज में शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थ एक साथ बिना ढक्कन के रखे पाए गए। किचन के हालात इतने खस्ताहाल थे कि ग्राहकों को भोजन के नाम पर सीधे बीमारियाँ परोसी जा रही थीं।
### **जांच में खुली पोल: मुनाफे के आगे सेहत दरकिनार**
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, होटल प्रबंधन केवल मुनाफा कमाने के चक्कर में नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहा था। जांच के दौरान निम्नलिखित गंभीर लापरवाही पाई गई:
* **वेज-नॉनवेज का घालमेल:** शाकाहारी और मांसाहारी सामग्री को एक ही फ्रीजर में बिना किसी विभाजन के रखा गया था।
* **अत्यधिक गंदगी:** रसोई के फर्श और दीवारों पर चिकनाई व कचरे का अंबार जमा था।
* **नियमों की अनदेखी:** भोजन बनाने व परोसने वाले कर्मचारियों ने कैप और ग्लव्स तक नहीं पहने थे।
* **पेस्ट कंट्रोल न होना:** रसोई में चूहों और कॉकरोच की रोकथाम के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी।
* **बदबूदार फ्रिज:** खाद्य सामग्री रखने वाले फ्रिज अंदर से बेहद गंदे और बदबूदार पाए गए, जो 'फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड एक्ट' का सीधा उल्लंघन है।
> **"निरीक्षण के दौरान वेज और नॉनवेज एक साथ रखे मिले और साफ-सफाई नदारद थी। जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा, इसलिए फर्म का लाइसेंस निलंबित किया गया है।"**
> — **आर. आर. देवांगन**, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग, बिलासपुर
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## **बड़ा सवाल: क्या दिखावे की जांच से सुधरेगी व्यवस्था या यूं ही चलता रहेगा खेल?**
मद्रासी होटल पर हुई यह कार्रवाई एक बानगी भर है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में होटल, रेस्टोरेंट, स्ट्रीट फूड और ठेलों पर स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।
### **1. बार-बार इस्तेमाल हो रहा जला हुआ तेल (कैंसर को न्योता)**
होस्टलों, ढाबों और स्ट्रीट वेंडर्स पर स्वाद और बचत के नाम पर एक ही खाद्य तेल को बार-बार डीप फ्राई के लिए इस्तेमाल किया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, जला हुआ तेल स्वास्थ्य के लिए ज़हर समान है और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बनता है।
### **2. स्वच्छता दरकिनार: बाथरूम के पास किचन और गंदा पानी**
कई छोटे-बड़े प्रतिष्ठानों और टेंट लगाकर चलने वाले नॉनवेज-वेज सेंटरों में किचन के पास ही बर्तन धुले जा रहे हैं, कचरे के डिब्बे बिना ढक्कन के खुले हैं और मक्खियाँ सीधे खाने पर बैठ रही हैं। पीने के पानी की शुद्धता की कोई जांच नहीं होती।
### **3. धार्मिक भावना और जन-आस्था से खिलवाड़**
सबसे गंभीर मुद्दा मांसाहार और शाकाहार के नाम पर ग्राहकों को दिए जाने वाले धोखे का है। कई प्रतिष्ठानों के नाम या ब्रांडिंग तो हिंदू देवी-देवताओं या विशुद्ध शाकाहारी नाम पर रखी जाती है, लेकिन अंदर रसोई में शाकाहार और मांसाहार एक ही बर्तन, एक ही तेल और एक ही फ्रिज में पकाया व स्टोर किया जाता है। आम नागरिक बिना जाने अपनी धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं से समझौता कर बैठते हैं।
### **4. पार्सल (Swiggy/Zomato) का अंधियारा**
ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप से खाना मंगवाने वाले ग्राहकों को कभी पता नहीं चल पाता कि जिस किचन में उनका खाना बन रहा है, वहाँ स्वच्छता का स्तर क्या है। डिलीवरी बॉय केवल खाना पार्सल करते हैं, लेकिन अंदर का सच सिर्फ होटल संचालक ही जानता है।
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### **आगे क्या? प्रशासन की चेतावनी**
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आने वाले दिनों में और तेज होगा। शहर के अन्य बड़े होटलों, ढाबों और रेस्टोरेंट की औचक जांच की जाएगी और गड़बड़ी मिलने पर बिना चेतावनी सीलिंग व भारी जुर्माने की कार्रवाई होगी। विभाग ने आम जनता से भी अस्वच्छता दिखने पर तुरंत शिकायत करने की अपील की है।
**अब देखना यह होगा कि क्या विभाग समय-समय पर सिर्फ 'सैंपल कलेक्शन' का खेल बंद कर वास्तविक धरातल पर गुमास्ता, स्वच्छता और खाद्य लाइसेंस की कड़ाई से जांच करेगा, या फिर यह व्यवस्था यूं ही चलती रहेगी?**


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