बिलासपुर, 22 जुलाई. बिलासपुर रेंज में अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) राम गोपाल गर्ग ने बुधवार को ‘प्रिवेंटिव पुलिसिंग’ विषय पर उच्च स्तरीय ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की। पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय, बिलासपुर से आयोजित इस कार्यशाला में रेंज के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी, थाना प्रभारी सहित लगभग 200 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।
कार्यशाला के दौरान अपराधियों की निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने, गुंडा एवं निगरानी बदमाशों के सत्यापन तथा आधुनिक पुलिसिंग प्रणाली को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।
कार्यशाला में सक्ती के पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने ‘गुंडा एवं निगरानी बदमाश’ विषय पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए प्रिवेंटिव पुलिसिंग और बेसिक पुलिसिंग को मजबूत करने के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने अपराधियों के रिकॉर्ड संधारण, निगरानी तंत्र और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला।
आईजी राम गोपाल गर्ग ने सभी जिलों में **‘एक गुंडा-एक जवान’** नीति लागू करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक निगरानी बदमाश की जिम्मेदारी एक पुलिसकर्मी को सौंपी जाए, ताकि उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जमानत पर रिहा होने के बाद दोबारा अपराध करने वाले आरोपियों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 480 के तहत तत्काल जमानत निरस्तीकरण की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
आईजी ने आदतन चोर, लुटेरे एवं संपत्ति संबंधी अपराधियों को **ए-क्लास निगरानी** तथा मारपीट, रंगदारी, भू-माफिया और अन्य असामाजिक तत्वों को **बी-क्लास गुंडा सूची** में शामिल करने के निर्देश दिए। साथ ही इन अपराधियों के फोटो, फिंगरप्रिंट, बैंक खातों सहित अन्य आवश्यक रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट रखने और गंभीर अपराधियों की गैंग हिस्ट्री शीट तैयार कर समय-समय पर उसका सत्यापन करने पर जोर दिया।
बैठक के दौरान गुंडा एवं निगरानी बदमाशों की **सरप्राइज चेकिंग** के लिए नई **स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP)** भी जारी की गई। इसके तहत पुलिस टीमों को अनिश्चित समय पर जांच करने, सुरक्षा मानकों का पालन करने, अपराधियों की आय एवं रहन-सहन का सत्यापन करने तथा थाना स्तर पर सभी अभिलेखों को व्यवस्थित और अद्यतन रखने के निर्देश दिए गए।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन निर्देशों का उद्देश्य अपराधियों पर सतत निगरानी रखकर पुनरावृत्ति रोकना, संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और रेंज में कानून-व्यवस्था को और अधिक म
जबूत बनाना है।



