बिलासपुर। पारिवारिक विवाद के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति-सास व ससुर की गिरफ्तारी पर रोक के लिए शर्त रखी है। याचिकाकर्ता पति को मीडिएशन सेंटर में एक लाख रुपये जमा करने और रसीद लेकर एसपी को दिखाने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मामला वैवाहिक विवाद से जुड़ा है, लिहाजा इसे मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए। कोर्ट ने दोनों पक्षों को 8 जून 2026 को हाईकोर्ट के मीडिएशन सेंटर में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में एक लाख रुपये जमा नहीं किए गए तो गिरफ्तारी पर दी गई अंतरिम सुरक्षा स्वतः समाप्त हो जाएगी। साथ ही आपराधिक याचिका भी बिना किसी अतिरिक्त आदेश के स्वतः खारिज मानी जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि दोनों पक्षों के बीच अंतिम समझौता हो जाता है तो जमा कराई जाने वाली राशि को उसी में समायोजित किया जाएगा।
यह है मामला
बिलासपुर के राजकिशोर नगर निवासी अंकुर गौराहा (32 वर्ष), पिता राकेश गौराहा (64 वर्ष) और मां रेखा गौराहा के खिलाफ अंकुर की पत्नी भाव्या गौराहा ने सारंगढ़ थाने में दहेज प्रताड़ना की एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर और आगे की दंडात्मक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।याचिका में कहा गया कि पत्नी भव्या द्वारा लगाए गए आरोप झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार शिकायत काफी विलंब से दर्ज कराई गई है तथा इसमें दहेज मांग या क्रूरता के कोई स्पष्ट और विश्वसनीय आरोप नहीं हैं।


