बलौदाबाजार हिंसा- भीड़ को उकसाकर करोड़ों का नुकसान कराया, अमित बघेल समेत 3 की जमानत खारिज

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बलौदाबाजार हिंसा- भीड़ को उकसाकर करोड़ों का नुकसान कराया, अमित बघेल समेत 3 की जमानत खारिज

 





बिलासपुर। हाईकोर्ट ने बलौदाबाजार हिंसा केस में अमित बघेल की जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस एनके व्यास ने सख्त टिप्पणी की है कि आरोपियों ने 7-8 हजार लोगों की भीड़ को भड़काकर 13 से 14 करोड़ रुपए की सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। साथ ही पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला भी कराया गया। कोर्ट ने कहा कि समाज में शांति और कानून व्यवस्था को पूरी तरह बिगाड़ने वाले ऐसे गंभीर अपराध में आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।
बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में 10 जून 2024 को एक सामाजिक मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जिसमें हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे। आरोप है कि वहां छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के पदाधिकारियों ने मंच से भड़काऊ भाषण देकर भीड़ को उग्र कर दिया।
इसके बाद हिंसक हुई भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़ते हुए कलेक्टोरेट और एसपी कार्यालय परिसर में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। सैकड़ों वाहनों में आग लगा दी गई और कलेक्टोरेट भवन को भी आग के हवाले कर दिया गया।
आगजनी से 13-14 करोड़ रुपए की सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।

इस दौरान बीच-बचाव कर रहे और ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों और जवानों पर लाठियों, पत्थरों और लोहे की रॉड से हमला किया गया, जिसमें कई कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हो गए थे
मामले में पुलिस ने छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के संस्थापक अमित बघेल, अजय यादव, दिनेश वर्मा समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसी मामले में अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश वर्मा ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी।
भीड़ ने कलेक्टोरेट भवन को पूरा आग के हवाले कर दिया था।

सुनवाई के दौरान अमित बघेल के वकील ने तर्क दिया कि, 10 जून को बलौदाबाजार में हिंसा के समय दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच वे अपनी पत्नी ईश्वरी बघेल के साथ रजिस्ट्रार कार्यालय में मौजूद थे। वकील ने बताया कि उस दौरान संजय कुमार सोनी के पक्ष में रजिस्ट्री की प्रक्रिया चल रही थी।
हालांकि हाईकोर्ट ने इस दावे को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पेश दस्तावेजों में ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि घटना के समय अमित बघेल रजिस्ट्रार कार्यालय में मौजूद थे। हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह दलील सच्चाई से परे नजर आती है।

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