बिलासपुर न्यूज़ डेस्क. न्यायधानी बिलासपुर की कानून व्यवस्था और यातायात प्रणाली को हाइटेक बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई महत्वाकांक्षी परियोजना 'इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' (ITMS) धरातल पर हांफती नजर आ रही है। शहर में सुरक्षा घेरे को अभेद्य बनाने के नाम पर करीब 173.41 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च किया गया, लेकिन जब बात किसी संगीन वारदात की गुत्थी सुलझाने की आती है, तो यह आधुनिक तंत्र पुलिस के लिए बहुत मददगार साबित नहीं हो पा रहा है।
तकनीकी खामियों, खराब रखरखाव और आउट ऑफ फोकस कैमरों की वजह से पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने के लिए आज भी निजी दुकानों और रिहायशी मकानों में लगे सीसीटीवी कैमरों का ही रुख करना पड़ रहा है।
## 526 कैमरों की निगरानी का दावा, हकीकत में कई चौराहे अंधे
स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत शहर के 46 प्रमुख चौक-चौराहों पर कुल 526 अत्याधुनिक कैमरे स्थापित किए गए थे। मंशा यह थी कि ये कैमरे न केवल रेड लाइट जंप करने वाले वाहनों के चालान काटेंगे, बल्कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या आपराधिक घटना के बाद आरोपियों की त्वरित पहचान में सुरक्षा एजेंसियों की मदद करेंगे।
हालांकि, जमीनी हकीकत इसके उलट है। शहर के सरकंडा क्षेत्र के कई प्रमुख तिराहों और चौराहों पर लगे अधिकांश कैमरे महीनों से निष्क्रिए पड़े हैं। वहां केवल ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे ही आंशिक रूप से संचालित बताए जा रहे हैं।
इसके अलावा, शहर के बेहद व्यस्त और संवेदनशील इलाकों जैसे:
* नेहरू चौक, अग्रसेन चौक और सत्यम चौक,
* मंगला चौक, महाराणा प्रताप चौक और इंदिरा गांधी चौक,
* राजीव गांधी चौक, भारतीय नगर चौक, सिटी मॉल तिराहा,
* रेलवे स्टेशन पहुंच मार्ग, गुरुनानक चौक और दयालबंद क्षेत्र
इन तमाम स्थानों पर लगे कैमरों का एंगल और फोकस खराब होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। धुंधली तस्वीरों और कटते फ्रेम के कारण संदिग्धों के चेहरे या वाहनों के नंबर प्लेट स्पष्ट पहचान में नहीं आते।
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## हालिया वारदातों में भी काम न आया 'स्मार्ट' तंत्र
आईटीएमएस की इस विफलता का असर पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सीधा पड़ रहा है। हाल ही में घटित बहुचर्चित बाल संप्रेषण गृह हत्याकांड हो या शहर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में हुई चोरी और लूट की घटनाएं, अधिकांश मामलों की जांच में पुलिस को सरकारी आईटी कैमरों से निराशा ही हाथ लगी।
मामलों के राजफाश के लिए एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) और स्थानीय पुलिस टीम को घटना स्थल के आसपास की निजी दुकानों, व्यावसायिक परिसरों और निजी मकानों में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगालने पड़े।
विशेष रूप से रात के समय स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है, क्योंकि स्ट्रीट लाइट और आईटी कैमरों के बीच तालमेल न होने या नाईट विजन तकनीक की कमी से फुटेज पूरी तरह ब्लैक आउट हो जाते हैं। इसी समस्या से निपटने के लिए पुलिस महकमे को त्रिनेत्र सेवा समिति से नाइट विजन कैमरे लगवाने तक की गुहार लगानी पड़ी है।
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## पुलिस कप्तान ने नगर निगम को लिखा पत्र
सिस्टम की इन निरंतर कमियों और उससे जांच में आ रही रुकावटों को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने गंभीरता दिखाई है। पुलिस प्रशासन की ओर से नगर निगम बिलासपुर को औपचारिक पत्र भेजकर आईटीएमएस के बंद पड़े कैमरों को तत्काल दुरुस्त कराने, खराब फोकस वाले कैमरों को री-अलाइन करने और पूरे नेटवर्क का मेंटेनेंस सुनिश्चित करने को कहा गया है।
अब देखना यह होगा कि करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट को संभालने वाली एजेंसियां कब तक इन तकनीकी खामियों को दूर कर पाती हैं, ताकि बिलासपुर शहर में अपराधियों पर तीसरी आंख का वास्तविक खौफ कायम हो सके।


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