रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के व्यस्तम व्यावसायिक क्षेत्र जयस्तंभ चौक स्थित 'रिलायंस ज्वेल्स' शोरूम में 17.50 लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषणों में हेराफेरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि शोरूम के ही एक पूर्व सेल्स स्टाफ ने धोखाधड़ी करते हुए 22 कैरेट सोने के कंगन पार कर दिए और उनकी जगह बिल्कुल वैसे ही दिखने वाले नकली (आर्टिफिशियल) कंगन रख दिए।
प्रबंधन की शिकायत पर गोलबाजार थाना पुलिस ने आरोपी पूर्व कर्मचारी के खिलाफ अमानत में खयानत और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इस तरह सामने आई हेराफेरी
मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी कर्मचारी शोरूम के डिस्प्ले और स्टॉक सेक्शन में कार्यरत था। उसने लंबे समय तक अपनी पहचान और पहुंच का फायदा उठाते हुए लगभग 17.50 लाख रुपये की कीमत के 22 कैरेट सोने के कंगन गायब कर दिए।
स्टॉक ऑडिट में तुरंत पकड़े जाने से बचने के लिए उसने एक सोची-समझी साजिश के तहत असली गहनों के वजन और डिजाइन से मिलते-जुलते नकली कंगन ट्रे में सजा दिए। इसके कारण रोजमर्रा के बदलाव और स्टॉक मिलान के दौरान किसी को भी शुरुआती शक नहीं हुआ।
मामले का खुलासा तब हुआ जब शोरूम के आंतरिक सुरक्षा दल और सीनियर ऑडिटर्स द्वारा इन्वेंट्री की सघन जांच और मैटेलिक वेरिफिकेशन किया गया। गहनों की बारीकी से जांच करने पर पता चला कि डिस्प्ले में रखे गए कंगन सोने के नहीं बल्कि नकली धातु के हैं।
पुलिस कार्रवाई और जांच के मुख्य बिंदु
रिलायंस ज्वेल्स प्रबंधन द्वारा मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद गोलबाजार पुलिस हरकत में आई। पुलिस टीम अब मामले से जुड़े सभी पहलुओं की कड़ाई से जांच कर रही है।
- सोने की बरामदगी: पुलिस आरोपी से पूछताछ कर गायब किए गए 17.50 लाख के सोने के कंगनों को बरामद करने की कोशिश कर रही है।
- CCTV फुटेज की पड़ताल: शोरूम के अंदर लगे उच्च क्षमता वाले सीसीटीवी कैमरों की हफ्तों पुरानी फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह अदला-बदली कब और कैसे की गई।
- मददगारों की तलाश: पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस पूरी साजिश में आरोपी के साथ शोरूम का कोई अन्य कर्मचारी या बाहरी सराफा व्यापारी भी शामिल था।
रिटेल सेक्टर के लिए बड़ा सबक
जयस्तंभ चौक जैसे प्रमुख स्थान पर स्थित इतने बड़े ब्रांडेड शोरूम में हुई यह घटना कॉर्पोरेट रिटेल और ज्वेलरी स्टोर्स के लिए आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाहरी सुरक्षा के साथ-साथ कर्मचारियों की दैनिक गतिविधियों और हाई-वैल्यू स्टॉक की नियमित तकनीकी जांच बेहद आवश्यक है।


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