बिलासपुर। हाईकोर्ट ने अपराधों की जांच में पुलिस की ढील पर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने एडवोकेट जनरल को सख्त लहजे में निर्देशित किया कि भविष्य में राज्य शासन की ओर से शपथ पत्र दाखिल करने में चूक और ढिलाई दोबारा नहीं दोहराई जानी चाहिए। शासन की ढिलाई के कारण साइबर ठगी के आरोपी को अंतरिम जमानत भी मिल गई है।
अंबिकापुर सरगुजा के साइबर रेंज पुलिस स्टेशन में शिकायतकर्ता रवि मोहन गोस्वामी ने ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस अनुसार साल 2024 में अज्ञात कॉलर्स ने उसे शेयर मार्केट में भारी मुनाफे का झांसा देकर मनी ट्रेड 365 और स्काई ट्रेड जैसे मोबाइल ऐप इंस्टाल करवाए। इसके बाद क्यूआर कोड और ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिए करीब 20 लाख रुपये की ठगी कर ली।इस मामले में हरियाणा रोहतक निवासी सिद्धार्थ सिक्का को एक मार्च 2026 को गिरफ्तार किया गया था, जिसने हाईकोर्ट में जमानत याचिका लगाई।
आरोपी सिद्धार्थ सिक्का की ओर से 6 सप्ताह की अंतरिम जमानत के आवेदन पर सुनवाई के दौरान वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता की पत्नी आईवीएफ तकनीक के जरिए गर्भवती हैं। उन्हें लगातार चिकित्सीय देखरेख और रोजाना हिपेनाक्स 60 इंजेक्शन की जरूरत होती है। परिवार में उनकी देखभाल के लिए कोई दूसरा सदस्य मौजूद नहीं है, इसलिए पति होने के नाते याचिकाकर्ता का उनके साथ होना बेहद जरूरी है।
पुलिस ने मेडिकल वेरिफिकेशन नहीं कराया
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में पुलिस को आरोपित की पत्नी के इलाज और आईवीएफ प्रेग्नेंसी से जुड़े मेडिकल दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। सुनवाई के दौरान जब राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने नगर पुलिस अधीक्षक का शपथपत्र प्रस्तुत किया, तो कोर्ट ने पाया कि उसमें मेडिकल वेरिफिकेशन को लेकर एक शब्द भी नहीं लिखा गया था। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह बेहद चिंताजनक है। वहीं यह भी कहा कि पुलिस ने जांच नहीं की है, तो आरोपी की दलील सच ही है और इस आधार पर उसकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली।


