विशेष रिपोर्ट | बिलासपुर (छत्तीसगढ़). न्यायधानी बिलासपुर के तोरवा क्षेत्र में स्थित **हरिओम मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल** इन दिनों गंभीर प्रशासनिक धांधली, अवैध निर्माण और संवेदनहीनता के आरोपों के कारण विवादों के घेरे में आ गया है। एक ओर जहां अस्पताल बिना पक्के लाइसेंस (स्थायी अनुमति) और स्वीकृत नक्शे के विपरीत बने भवन में संचालित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर इलाज के नाम पर अतिरिक्त पैसों की अघोषित मांग करने और भुगतान न होने पर शव रोके रखने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने अस्पताल के संचालक डॉ. अभिषेक कश्यप को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। साथ ही पूरे घटनाक्रम की दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए सीसीटीवी फुटेज की जांच के साथ एक पृथक जांच टीम गठित कर दी गई है।
### 1. बिना स्थायी लाइसेंस मरीजों की जान से खिलवाड़
नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के तहत किसी भी अस्पताल को संचालित करने के लिए नगर निगम, पर्यावरण संरक्षण मंडल और होमगार्ड/फायर विभाग से एनओसी (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य होता है।
* **अस्थायी अनुमति की आड़:** जानकारी के अनुसार, अस्पताल में 1 अप्रैल से ही मरीजों को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया था। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण स्वास्थ्य विभाग ने अब तक इसे स्थायी लाइसेंस जारी नहीं किया है। अस्पताल प्रबंधन 'अस्थायी अनुमति' की आड़ लेकर बदस्तूर अपनी दुकानें चला रहा है, जो मरीजों की सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है।
### 2. स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण, 4 महीने से फाइल दबाए बैठा है नगर निगम
अस्पताल जिस भवन में चल रहा है, उसकी वैधानिकता पर नगर निगम की भवन शाखा ने खुद सवाल उठाए हैं:
* **भवन अधिकारी का बयान:** नगर निगम के भवन अधिकारी अनुपम तिवारी के मुताबिक, अस्पताल परिसर का निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुसार नहीं किया गया है।
* **नो-रिस्पॉन्स पर भी राहत:** निगम द्वारा नोटिस जारी कर नियमितीकरण (Regularisation) कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने न तो संतोषजनक जवाब दिया और न ही प्रक्रिया पूरी की। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले चार महीनों से यह फाइल नगर निगम की भवन शाखा में लंबित पड़ी है और अस्पताल पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
### 3. शव रोकने और भारी-भरकम राशि वसूलने का संगीन आरोप
ग्राम नेउर निवासी स्वर्गीय तिलबसिया को 25 जुलाई को गंभीर अवस्था में हरिओम अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
* **परिजनों का आरोप:** परिजनों ने बताया कि इलाज के एवज में पहले उनसे ₹21,000 जमा करवाए गए। बाद में अस्पताल प्रशासन ने ₹84,000 की अतिरिक्त मांग रख दी। परिजनों का आरोप है कि पूरी रकम न चुका पाने की स्थिति में अस्पताल प्रशासन ने मृतका का शव सौंपने में बेवजह देरी की और परिजनों को मानसिक प्रताड़ना दी।
* **CMHO की जांच बैठाई:** अस्पताल संचालक डॉ. अभिषेक कश्यप द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण से असंतुष्ट होकर CMHO ने मामले में सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगालने और अस्पताल कर्मचारियों के बयान दर्ज करने के लिए एक विशेष जांच टीम का गठन किया है।
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### शासन-प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों हेतु तीखे सवाल:
यह पूरा मामला निजी स्वास्थ्य संस्थानों की मनमानी और प्रशासनिक ढिलाई की पोल खोलता है:
1. **नगर निगम की भूमिका पर सवाल:** जब 4 महीने से अस्पताल भवन का नक्शा अवैध पाया गया है, तो निगम प्रशासन ने अब तक अस्पताल परिसर को सील क्यों नहीं किया? क्या किसी हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
2. **स्वास्थ्य विभाग की ढिलाई:** केवल 'आवेदन जमा करने' या 'अस्थायी लाइसेंस' के आधार पर गंभीर मरीजों के इलाज की छूट देना कितना उचित है?
3. **जनप्रतिनिधि तुरंत लें संज्ञान:** बिलासपुर के क्षेत्रीय सांसद, विधायक एवं नगर निगम महापौर को इस गंभीर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि निजी अस्पतालों की इस तरह की लूटखसोट और संवेदनहीनता पर अंकुश लगाया जा सके।


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