आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने आज नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टीन ऑडिटोरियम में हडको (हुडको) के वार्षिक दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के शहरी विकास मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की उपस्थिति रही, जो देश की शहरी विकास यात्रा के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
अपने उद्घाटन संबोधन में साहू ने कहा कि यह अवसर केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारत के शहरी भविष्य को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने इसे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प के अनुरूप एक “महायज्ञ” बताते हुए कहा कि बुनियादी ढांचा आधारित विकास देश की प्रगति का प्रमुख आधार है।
साहू ने कहा कि वर्ष 2030 तक भारत के 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य में शहरों की केंद्रीय भूमिका होगी। उन्होंने बताया कि 2050 तक देश की शहरी आबादी 50 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है, जिसके लिए लगभग 2.4 ट्रिलियन डॉलर के शहरी निवेश की आवश्यकता होगी। इस दिशा में नवाचारी वित्तीय तंत्र एवं सुदृढ़ योजना ढांचे की आवश्यकता पर उन्होंने बल दिया।
उन्होंने ‘अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ)’ एवं ‘अर्बन इन्वेस्टमेंट विंडो (UiWIN)’ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये योजनाएं शहरी स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने, निवेश योग्य परियोजनाओं को विकसित करने तथा म्युनिसिपल बॉन्ड, वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) एवं इक्विटी जैसे आधुनिक वित्तीय साधनों के उपयोग को बढ़ावा देंगी।
साहू ने कहा कि केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल के मार्गदर्शन में शहरी बुनियादी ढांचे की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। केंद्रीय बजट 2026-27 में ₹12.2 लाख करोड़ के रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय के साथ शहरी विकास को प्राथमिकता दी गई है, जिसमें विशेष रूप से टियर-II एवं टियर-III शहरों तथा तीर्थ स्थलों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान ‘UiWIN टेक्निकल असिस्टेंस फ्रेमवर्क’, ‘शेल्टर’ पत्रिका सहित विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन किया गया तथा दीर्घ सेवा पुरस्कार भी प्रदान किए गए। साथ ही शहरी अवसंरचना में सार्वजनिक-निजी भागीदारी को सुदृढ़ करने और वित्तीय रूप से व्यवहार्य परियोजनाओं के विकास पर केंद्रित तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
इस अवसर पर साहू ने हडको की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि संस्था राज्यों एवं शहरों को परियोजना संरचना, व्यवहार्यता आकलन एवं डीपीआर निर्माण में व्यापक परामर्श सेवाएं प्रदान कर सकती है तथा शहरी परियोजनाओं के लिए पूरक वित्तपोषण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इसी दिन साहू ने केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल के साथ ‘अर्बन चैलेंज फंड’ राज्य समीक्षा बैठक की सह-अध्यक्षता भी की, जिसमें विभिन्न राज्यों के शहरी विकास मंत्रियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में राज्यों द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक परियोजना प्रस्तावों की समीक्षा की गई तथा समयबद्ध क्रियान्वयन, वित्तीय स्थिरता एवं निवेश आधारित विकास पर बल दिया गया।
साहू ने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत परियोजनाओं की लागत का न्यूनतम 50 प्रतिशत बाजार आधारित स्रोतों से जुटाने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे वित्तीय अनुशासन एवं निवेश आकर्षण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे मजबूत राजस्व मॉडल, यथार्थवादी नकदी प्रवाह एवं संतुलित जोखिम प्रबंधन के साथ व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार करें।
उन्होंने शहरी स्थानीय निकायों की क्षमता वृद्धि, डेटा-आधारित योजना निर्माण, पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया एवं निवेशकों के साथ सक्रिय सहभागिता की आवश्यकता पर भी बल दिया।
साहू ने हडको के प्रबंधन एवं कर्मचारियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि संस्था ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।

.jpeg)
