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केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय रीसाइक्लिंग इनक्यूबेशन समिट (आईआरआईएस) 2026 का उद्घाटन किया,SBM-U 2.0 अपशिष्ट प्रबंधन से संसाधन पुनर्प्राप्ति की दिशा में निर्णायक परिवर्तन का प्रतीक: तोखन साहू




नई दिल्ली, 16 जनवरी 2026. केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री  तोखन साहू ने आज इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय रीसाइक्लिंग इनक्यूबेशन समिट (आईआरआईएस) 2026 का उद्घाटन किया। दो दिवसीय यह शिखर सम्मेलन आईपीसीए सेंटर फॉर वेस्ट मैनेजमेंट एंड रिसर्च (आईसीडब्ल्यूएमआर) द्वारा आयोजित किया गया है, जो भारतीय प्रदूषण नियंत्रण संघ (आईपीसीए) और टेरी स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज़ की संयुक्त पहल है।








“सर्कुलर इकॉनमी के लिए सतत अपशिष्ट आपूर्ति श्रृंखला और लो-कार्बन पाथवे का एकीकरण” विषय पर आधारित आईआरआईएस 2026 वैश्विक स्तर पर संवाद, सहयोग और व्यावहारिक समाधानों का एक सशक्त मंच है। इसमें सरकार, उद्योग जगत, स्टार्ट-अप्स, शोध संस्थान, गैर-सरकारी संगठन और शिक्षाविद एक साथ एकत्र हुए हैं।


मुख्य भाषण देते हुए श्री साहू ने कहा कि भारत की सतत विकास यात्रा सहयोगात्मक, विज्ञान-आधारित और क्रियान्वयन-उन्मुख होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत मिशन एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है।


उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 के अंतर्गत उल्लेखनीय प्रगति हुई है—आज लगभग 97 प्रतिशत शहरी वार्डों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण हो रहा है, 80 प्रतिशत से अधिक अपशिष्ट का प्रसंस्करण किया जा रहा है तथा 62 प्रतिशत लेगेसी डंपसाइट्स का निस्तारण कर 8,400 एकड़ से अधिक भूमि पुनः प्राप्त की जा चुकी है।


श्री साहू ने कहा कि शहरी भारत प्रतिदिन लगभग 1.5 लाख मीट्रिक टन ठोस अपशिष्ट उत्पन्न करता है, जो एक बड़ी चुनौती है। इस संदर्भ में एसबीएम-यू 2.0 को उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन से संसाधन पुनर्प्राप्ति की ओर निर्णायक बदलाव बताया, जिसका लक्ष्य वर्ष 2026 तक 4,900 से अधिक शहरी निकायों में 100 प्रतिशत अपशिष्ट प्रसंस्करण और शून्य डंपसाइट्स हासिल करना है।


उन्होंने सामग्री पुनर्प्राप्ति सुविधाओं (एमआरएफ) के विस्तार, यांत्रिकीकरण, गीले कचरे के प्रबंधन हेतु कंपोस्टिंग, बायो-मेथनेशन, संपीड़ित बायोगैस और बड़े शहरों में संचालित वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्रों जैसी पहलों पर प्रकाश डाला।


श्री साहू ने नवाचार और स्टार्ट-अप्स की भूमिका को रेखांकित करते हुए स्वच्छता स्टार्टअप चैलेंज और गार्बेज-फ्री सिटीज़ के लिए स्टार्टअप गेटवे जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सर्कुलर इकॉनमी को सशक्त रूप से लागू करने से ठोस अपशिष्ट क्षेत्र अकेले ही भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) लक्ष्यों में 10–15 प्रतिशत तक का योगदान दे सकता है।


समावेशिता पर बल देते हुए श्री साहू ने स्वच्छता कर्मियों, कचरा बीनने वालों, जमीनी संगठनों, शिक्षाविदों और शोध संस्थानों के योगदान की सराहना की तथा विज्ञान-आधारित शोध और क्षमता निर्माण को और मजबूत करने का आह्वान किया।


अपने संबोधन के समापन पर श्री साहू ने कहा कि आईआरआईएस 2026 स्वच्छ, सशक्त और सतत भारत के निर्माण की दिशा में साझेदारी, नवाचार और सहयोग को नई गति देगा, जहां कचरा संपदा बने, शहर सर्कुलर हों और विकास समावेशी हो।

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