छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल, न्यायालय ने विश्वविद्यालय से मांगा स्पष्टीकरण,गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर की चयन प्रक्रिया पर संदेह — न्यायालय ने 27 अक्टूबर तक मांगा जवाब

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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल, न्यायालय ने विश्वविद्यालय से मांगा स्पष्टीकरण,गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर की चयन प्रक्रिया पर संदेह — न्यायालय ने 27 अक्टूबर तक मांगा जवाब

 







बिलासपुर, 10 अक्टूबर 2025। (सुनवाई 9 अक्टूबर को हुई थी)

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGV) की असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।


याचिकाकर्ता नवीन चौबे ने अधिवक्ता अशुतोष शुक्ल के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में की जा रही अनियमितताओं को उजागर करते हुए न्यायालय से न्याय की मांग की।




मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ के समक्ष हुई।


याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशुतोष शुक्ल ने न्यायालय को अवगत कराया कि विश्वविद्यालय की भर्ती विज्ञापन “त्रुटिपूर्ण और अस्पष्ट” है, जिससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।









अधिवक्ता शुक्ल ने तर्क दिया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा वर्ष 2014 में बनाए गए विनियमों के अनुसार, “Perspective in Education**” या “Foundation Course” आदि पदों हेतु नियुक्तियाँ केवल उन्हीं अभ्यर्थियों से की जानी चाहिए जिनके पास परिषद द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यताएँ मौजूद हों।


उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने अपने विज्ञापन में यह स्पष्ट नहीं किया कि किस विषय हेतु असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति की जा रही है, जिसके कारण यह विज्ञापन NCTE विनियम, 2014 के अनुरूप नहीं माना जा सकता।


इस पर न्यायमूर्ति व्यास ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि वह यह विश्विद्यालय जवाब प्रस्तुत करे कि जारी किया गया विज्ञापन किस विषय के लिए है, तथा क्या यह NCTE के नियमों के अनुरूप है या नहीं।

न्यायालय ने मामले को 27 अक्टूबर 2025 की तिथि पर पुनः सुनवाई हेतु सूचीबद्ध किया है।


न्युज समाप्त  l



महत्वपूर्ण बिंदु: 


गौरतलब है कि विशेषज्ञों का मानना है कि Teacher Education Institutions  को मान्यता राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) प्रदान करती है। परिषद द्वारा निर्धारित मानकों और नियमों का उल्लंघन संबंधित विभाग या संस्था की मान्यता पर भी भविष्य में संकट खड़ा कर सकता है,  जिसका खामियाजा वहाँ के विद्यार्थियों को भुगतना पड सकता है ।

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