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High Court: तिफरा में रुके औद्योगिक विकास पर आएगी गति, वर्षों से कानूनी लड़ाई में उलझा था मामला

 







बिलासपुर। तिफरा स्थित औद्योगिक क्षेत्र के सेक्टर डी में 300 मीटर सड़क निर्माण का रास्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद साफ हो गया है। कोर्ट ने कहा है कि राज्य शासन पहले इस निजी जमीन का विधिवत अधिग्रहण करे। भू स्वामी को मुआवजे का भुगतान करने के बाद ही इस सड़क को बनाया जाए। तिफरा सेक्टर डी महज 300 मीटर जमीन के विवाद के चलते कई सालों तक आबाद नहीं हो सका था।

तिफरा में यदुनंदन नगर के पीछे 62 एकड़ सरकारी जमीन को इंडस्ट्रियल एरिया के तौर पर विकसित करने की योजना 2001-02 में बनाई गई। सरकारी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 30 मार्च 2017 को टेंडर जारी हुआ, रायपुर की कंपनी ए टू जेड प्राइवेट लिमिटेड को 27 अगस्त 2018 को वर्क ऑर्डर जारी किया गया। सेक्टर डी में 4 करोड़ रुपए खर्च कर सड़क, 1 करोड़ में नाली और 3 करोड़ से पोल, लाइटिंग और पानी सप्लाई की व्यवस्था की गई। करीब 2 करोड़ रुपए से सब स्टेशन भी बना। कुल 10 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन उद्योग विभाग, सीएसआईडीसी और प्रशासन 300 मीटर जमीन का विवाद नहीं सुलझा सका। इस वजह से प्रोजेक्ट वर्षों से अटका रहा। सेक्टर डी को एनएच से जोड़ने के लिए जो  300 मीटर जमीन चिन्हित की गई उसको लेकर विवाद उठा। इसके निजी जमीन होने का दावा किया गया। जबकि अधिकारियों का कहना था कि मास्टर प्लान में यह जमीन सड़क के तौर पर दर्ज है।

पूर्व में हाईकोर्ट के आदेश के बाद तत्कालीन महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा ने कलेक्टर, निगम आयुक्त, एसडीएम और सीएसआईडीसी की बैठक ली। नगर निगम को सड़क बनाने का जिम्मा सौंपा गया है। सड़क बनाई भी जाने लगी। इसके खिलाफ  आभा जायसवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि 300 मीटर जमीन उनकी है। इस पर सड़क बनाने पर ऐतराज नहीं है लेकिन शासन ने इसका अधिग्रहण नहीं किया है और ना ही मुआवजा दिया। जस्टिस रविन्द्र कुमा अग्रवाल ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा है कि प्रोजेक्ट और सड़क बनाने से पहले राज्य शासन पहले विधिवत इस निजी जमीन का अधिग्रहण करते हुए भू स्वामी को मुआवजे का भुगतान करे। इसके बाद ही इस सड़क को बनाया जाए।

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