बिलासपुर। प्रदेश के पांच हजार से अधिक स्कूलों गर्ल्स टायलेट नहीं है तो 8 हजार से अधिक स्कूल ऐसे हैं शौचालय की स्थिति बेहद खराब है। इससे बच्चे और शिक्षक त्रस्त है और लगातार स्कूल शिक्षा विभाग से इसकी मांग कर रहे हैं। इसका खामियाजा बच्चों और शिक्षकों को यूरिन इन्फेक्शन के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
हरिभूमि में खबर प्रकाशित होने के बाद अब इस पूरे मामले में हाई कोर्ट ने संज्ञान ले लिया है और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और शासन को नोटिस भेज कर इसकी स्थिति स्पष्ट करने की बात कही है। बिलासपुर जिले के बात करें तो 160 से अधिक स्कूलों में टॉयलेट की बड़ी समस्या है। 200 से ज्यादा ऐसे विद्यालय है, जहां टायलेट हैं तो लेकिन उपयोग के लायक नहीं।
अब हालांकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आखिरकार स्कूलों में गर्ल्स टॉयलेट को लेकर शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। विभाग ने 8 मार्च तक सभी जिलों में सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग टॉयलेट की व्यवस्था करने का फरमान जारी कर दिया है।
ध्यान रहे कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यू-डाइस रिपोर्ट 2024-25 में प्रदेश के करीब 5500 स्कूलों में गर्ल्स टॉयलेट नहीं होने का खुलासा हुआ था। पिछले वर्ष युक्तियुक्तकरण में स्कूलों का मर्जर होने के बाद समस्या का कुछ समाधान तो हुआ लेकिन अभी भी एक हजार से अधिक स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग टॉयलेट उपलब्ध नहीं हो पाया है। बिलासपुर, रायपुर, कोरबा, बस्तर और जांजगीर-चांपा के स्कूलों में गर्ल्स टॉयलेट की सबसे अधिक कमी है। विभागीय निर्देशों के बाद जिन स्कूलों में टॉयलेट जर्जर या अनुपयोगी स्थिति में हैं, वहां मरम्मत शुरू कर दी गई है। वैसे स्कूल जहां लड़के और लड़कियां दोनों पढ़ते हैं और वहां एक ही टॉयलेट उपलब्ध है तो उसे गर्ल्स टॉयलेट बना दिया गया है। इसके लिए इन स्कूलों ने विभाग के लगभग 10 साल पुराने आदेश का सहारा लिया है।
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सरकारी स्कूलों में छात्राओं की संख्या 19.54 लाख
गौरतलब है कि अगर पिछले वर्ष स्कूलों के युक्तियुक्तकरण के दौरान मर्जर से प्रदेश में गर्ल्स टॉयलेट स्कूलों की संख्या बढ़ गई। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यू-डाइस रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार छत्तीसगढ़ में 48757 सरकारी स्कूल संचालित थे। इनमें 37.64 लाख विद्यार्थी हैं। इनमें छात्राओं की संख्या 19.54 लाख है। युक्तियुक्तकरण के बाद स्कूलों की संख्या घटकर 38 हजार हुई। लिहाजा बिना गर्ल्स टॉयलेट वाले 5500 स्कूलों में से अभी भी एक हजार से अधिक स्कूलों में गर्ल्स टॉयलेट नहीं है।



