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दिखावे की भक्ति से नहीं, बल्कि सच्चे मन से सुमिरन करने से प्रसंन्न होते हैं भगवान, सुदामा भैया जी ने अमृतवाणी में सुनाए गुरु के सच्चे वचन

 




धन धन गुरु नानक देव जी के 554 वें प्रकाश उत्सव के अवसर पर आदर्श कॉलोनी दादी खुशी लंगर हाल में 11 से 1:00 बजे तक बाबा आनंद राम दरबार के संत सांई कृष्ण दास जी एवं बाबा आनंद राम दरबार रायपुर के सांई सुदामा भैया जी के द्वारा सत्संग कीर्तन करके साध संगत को निहाल किया अपनी अमृतवाणी में सुदामा भैया जी ने गुरु के कई अमृत वचनों का भक्तों को रसपान कराया ज्ञानवर्धक  दो प्रसंग सुनाए जिसमें एक  प्रसंग  है कि आजकल लोग भक्ति भी दिखाकर करते हैं 



दिखाकर भक्ति करने से व नाम कि माला जपने से भगवान प्रसन्न नहीं होते हैं आप भली मंदिर मत जाओ कहीं भी मत जाओ अपने घर में रहो पर भाव से सच्चे मन से भगवान को अगर सिमरन करेंगे उन्हें याद करेंगे नाम जपेंगे तो भगवान प्रसन्न होंगे और आपको दर्शन देंगे आपके कष्ट सब दूर करेंगे और दिखाकर आप सालों साल  भक्ति करते  रहो भगवान दर्शन देने वाले नहीं हैं आप लोगों को मूर्ख बना सकते हो भगवान को नहीं उन्होंने एक कथा सुनाई एक जंगल में भील रहता था अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ एक रात्रि के समय एक राजा आया और भील के कुटिया के बाहर दरवाजा खटखटाया भील ने दरवाजा खोल राजा ने अपना परिचय दिया



 उन्होंने बताया कि वह शिकार पर निकले थे पर अपने सैनिकों से दूर हो गए रास्ता भटक गए और रात्रि का समय है मुझे एक रात्रि गुजरने के लिए जगह दे दो वह भील राजा को नमन किया वह कहा बड़ी खुशी  की बात है और अच्छी किस्मत है हमारी आज की आप हमारे यहां   ईस झोपड़ी में पधारे हैं 



 आईए  राजा जी बैठिए भील बहुत गरीब था एक ही रुम में खाना भी बनाते थे और जमीन में सोते भी थे खाने के लिए गाजर थी कुछ  जंगली फल उसने राजा को दिए और राजा से कहा कि आप इन्हें खाकर यही सो जाइए मैं आज की रात बाहर सोऊंगा भील झोपड़ी के बाहर सो गया ठंड बहुत ज्यादा थी कप-कपा  रहा था अमृतवेले में राजा की आंख खुली तो राजा उठा बाहर निकाला देखा भील बाहर सो रहा है जब उसे जगाने की कोशिश की तो उसके प्राण जा चुके थे राजा को बहुत दुख हुआ कि मेरी मौत को बचाने के लिए खुद  बाहर सोकर प्राण  दे दिए  इतने समय में सैनिक खोजते हुए राजा के पास पहुंचे मंत्री को राजा ने सारी बात बताई वह धन दौलत सोने चांदी की जेवरात सब उसे भील के चरणों में रख दिए मंत्री ने कहा राजन आप जाइए हम यहां बैठे हैं राजा जब जाने लगे जैसे ही रथ पर सवार होने लगे उनका मन नहीं लगा वह वापस आ गए और सैनिक को मंत्री को कहा कि आप जाओ मैं आता हूं बाद में उन्होंने भील की पत्नी को बच्चों को जगाया और सारी बात बताई राजकीय सम्मान के साथ  भील का अंतिम संस्कार किया गया राजा ने बड़ा सुंदर मकान व खेत खलियान और भील के परिवार को दिया धन दौलत दी ताकि उसकी जिंदगी भर उन्हें कोई परेशानी ना हो समय बिता गया पर कहीं ना कहीं राजा को अंदर ही अंदर इस बात की पीड़ा खाई जा रही थी कि मेरे कारण ऐसा हुआ उन्हें चैन नहीं था एक दिन उसके गुरु  समथ रामदास जी पहुंचते हैं और गुरु को सारी कहानी बताते हैं गुरु कहते हैं बच्चा इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है यह विधि का विधान है पर राजा को तभी भी शांति नहीं मिलती है तब गुरु कहते हैं चलो आज मैं तुम्हें अपने एक भक्त के यहां  घुमाने ले चलता हूं वह बड़ा नगर सेठ है राजा अपने गुरु के साथ अन्य प्रांत में पहुंचते हैं गुरु कहते हैं राजा तुम अपना वैश बदल दो एक दास की तरह  राजा गुरु की आज्ञा   मानकर राजा अपना  वैस बदलकर दास बन जाता है और गुरु के साथ उसके शिक्षय के घर नगर सेठ के घर पहुंचता है नगर सेठ जब देखता है गुरु को तो खुश हो जाता है वह गुरु को बताता है गुरुजी आज  मे बहुत  प्रसन्न हूं 5 दिन पूर्व ही मुझे पोता हुआ है मेरे बेटे को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है आप बच्चों को आशीर्वाद दीजिए वह नामकरण कीजिए नगर सेठ अपने पोते को लेकर आता है गुरु के हाथों में देता है गुरु कहते हैं तुम जाओ हमारे लिए भोजन की व्यवस्था करो नगर सेठ अंदर जाता है भोजन की व्यवस्था करने के लिए तब गुरु उस छोटे से बच्चे के कान में कहता है बताओ तुम कोन  हो तब  गुरु राजा को कहता है पास  आओ और वह छोटा बालक 5 दिन का बड़े लोगों की तरह बात करता है वह गुरु को बताता है कि वह कुछ महापूर्वक एक भील था और सारी कहानी बताता है और मेरी मृत्यु कैसे हुई और अब मेरा दूसरा जन्म हुआ है इस नगर सेठ के घर में सारी बात सुनकर राजा के आंखों से आंसू बहते हैं यह खुशी के आंसू होते हैं फिर गुरु उसे बच्चे के सिर पर हाथ लगाते हैं फिर बच्चा वापस रोने लगता है यह सब उस राजा को दिखाने के लिए गुरु ने चमत्कार किया था इस कहानी का तात्पर्य यह है 

आप  कर्म करो बाकी सब प्रभु पर छोड़ दो संत कृष्ण दास जी के द्वारा कई भक्ति भरे भजन गुरबाणी गाई जीसे सुनकर भक्तजन भाव विभोर हो गए

 कीर्तन के आखिर में आरदास की गई गुरु का हुक्म नाम पढ़ा गया प्रसाद  वितरण किया गया आज के इस सत्संग कीर्तन को सफल बनाने में आदर्श कॉलोनी गुरुद्वारा सेवा समिति के सभी सदस्यों का विशेष सहयोग रहा  जीसमे प्रमुख है रवि जसपाल भाई राजा भाई रवि प्रितवानी बल्लू हरियानी विजय दुसेजा वह कई सदस्यों का विशेष  रहा


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