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कभी कभी अतिआत्मविश्वास आपके पतन का कारण बनता है..... आखिरी क्या हुआ UPमें ? उत्तरप्रदेश में आए नतीजों का सबसे सटीक विश्लेषण

 





1.कभी कभी अतिआत्मविश्वास आपके पतन का कारण बनता है ,यूपी चुनावों में भाजपा के साथ वही हुआ ,यूपी सरकार से कुछ समस्याएं है लेकिन वो समस्याएं इतनी बड़ी नही है कि आप 50 सीट न जीत पाए ,ये चुनाव पूरी तरह से मोदी-योगी vs भाजपा था ,लोग अपने से ही लड़ रहे थे जिसका फायदा विपक्ष को हुआ ।


2.सबसे पहले अतिआत्मविश्वास में आपने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजपूत नारागजी का मुद्दा बना दिया और सबसे बड़ा कारण गाज़ियाबाद सीट से राजपूत का टिकट कटना ,जिसकी वजह से भाजपा मुज़्ज़फरनगर ,कैराना सीट हार गई और यहां के सांसदों का जातिवादी रवैया भी इसका प्रमुख कारण बना ।


3.राजपूत नाराजगी का ये मुद्दा दूसरे और तीसरे,चौथे चरण में भाजपा को देखने को मिला ,आवंला सीट से भाजपा सांसद का सवर्णों के ख़िलाफ़ का वीडियो आया जिसका परिणाम ये है कि सवर्ण नाराज हुए और 15k से चुनाव हार गए ,फिर भाजपा ने शाक्य ,सैनी जैसी जातियों को किनारे किया जिससे उनमें नाराजगी हुई


4.बदायूं जैसी सीट भाजपा सिर्फ कमल निशान पे नही जीत सकती थी उसको ऐसे नेता चाहिए थे जो बसपा का मूल वोट भी लेके आते जिसके लिए सिनोद शाक्य जैसे उम्मीदवार अच्छे होते जिनको आपने 2022 में जॉइन ही इसीलिए करवाया था ,फिर बुंदेलखंड में भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ लोध और ब्राह्मण की नाराजगी ।


5.हमीरपुर में लोध और बाँदा में ब्राह्मण भाजपा के खिलाफ गए और कारण सिर्फ उम्मीदवार/सांसद था ,फर्रुखाबाद में सवर्णों की नाराजगी भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ थी जिससे वोटिंग कम हुई शहरी क्षेत्र में और शाक्य ने अपने सजातीय उम्मीदवार का साथ दिया ,जैसे तैसे भाजपा सीट जीत सकी।


6.धौरहरा जोकि ब्राह्मण/कुर्मी/राजपूत बाहुल्य सीट वहाँ भाजपा सांसद का सवर्ण विरोधी बयान भारी पड़ा ,ठाकुर ने अपने सजातीय सपा उम्मीदवार को वोट किया और ब्राह्मण भी काफी सपा को गया जिससे ये सीट भाजपा 4400 वोट से हार गई ,खीरी में कुर्मी ने अपने सजातीय उम्मीदवार को दिया टेनी हार गए।


7.सीतापुर भाजपा सांसद के खिलाफ सभी सवर्ण जातियां थी जिसका नुकसान ये हुआ कि सबने मिलके उम्मीदवार के खिलाफ कांग्रेस को वोट किया ,मोहनलालगंज भाजपा सांसद को सवर्णों की नाराजगी झेलनी पड़ी और भाजपा वो सीट हार गई ,ये चुनाव भाजपा के जातिवादी मठाधीश सांसदों को हराने का ज्यादा दिखा ।


8.अयोध्या में लल्लू सिंह ने संविधान बदलने का मुद्दा उठाया ,अब दलित और पिछडो के लिए संविधान बदलने का मुद्दा मतलब उनका आरक्षण खत्म करना ,तो छोटी जातियों में राशन पे आरक्षण भारी पड़ा ,जिसका असर पूर्वांचल ,बुंदेलखंड ,अवध में देखने को मिला और भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया ।


9. भाजपा ने अयोध्या ,बस्ती ,देवीपाटन मंडल से कुर्मी को किनारे किया जिसका नुकसान भाजपा को अवध और पूर्वांचल की हर सीट पे देखने को मिला और इससे खुद प्रधानमंत्री मोदी नही बच पाए ,कुर्मी बाहुल्य सेवापुरी और रोहनिया सीट पे मोदी जी का मार्जिन 2019 के अपेक्षा सबसे ज्यादा घटा है ।


10. यादव ,मुस्लिम और कुर्मी का जो मजबूत गठजोड़ सपा ने विधानसभा चुनाव से तैयार किया था उसका लोकसभा चुनाव में खूब फायदा मिला,कुर्मी ने भाजपा कुर्मी उम्मीदवारों को भी पूरी तरह वोट नही किया उनकी पहली प्राथमिकता सपा उम्मीदवार था और जहाँ भाजपा से कुर्मी था उसको भी 60-70% से ज्यादा नही दिया


11.प्रयागराज मंडल में भाजपा सिर्फ फूलपुर सीट शहर उत्तरी की वजह से जीत पाई ,इलाहाबाद लोकसभा में भाजपा को उसके स्थानीय नेताओं ने हरा दिया ,भाजपा को ब्राह्मण वोट भी नही मिला ,नंदी की शहर दक्षिणी से जहाँ पिछली बार 50k से ज्यादा की बढ़त थी वो अबकी बार सिर्फ 7k थी ,मेजा में भी वही हुआ।


12.फतेहपुर में कुर्मी ने अपने सजातीय सपा उम्मीदवार को वोट किया,कौशाम्बी में पासी बाहुल्य सीट पे सोनकर को टिकट देना भारी पड़ा,जिनका सवर्णों के खिलाफ खूब वीडियो वायरल हुआ और राजा भैया से भी अदावत है उनकी,प्रतापगढ़ में ठाकुर/कुर्मी ने पूरी तरह सपा को वोट किया ,प्रमोद तिवारी का साथ मिला


13.सुल्तानपुर में ठाकुरों ने मेनका गांधी के खिलाफ वोट किया ही साथ मे कुर्मी और निषाद ने सजातीय उम्मीदवार को वोट की और संविधान बचाने को दलित भी साथ आये ,यही ट्रेंड मछलीशहर, जौनपुर में देखने को मिला सपा को उम्मीदवार के सजातीय वोट के साथ यादव मुस्लिम कुर्मी का भरपूर साथ मिला ।


14. बस्ती में भाजपा सांसद से इतनी नाराजगी थी कि खुद ब्राह्मण उनके खिलाफ थे ,आजादी के बाद पहली बार सपा ये सीट जीती और कारण थे राम प्रसाद चौधरी जो न सिर्फ बसपा का मूल वोट बल्कि कुर्मी के साथ भाजपा का मूल ब्राह्मण वोट भी लेने में सफल रहे ।


15.अम्बेडकर नगर में कुर्मी के साथ बसपा का कैडर वोट लालजी वर्मा के साथ रहा जिसका फायदा मिला ,श्रावस्ती में यादव मुस्लिम और कुर्मी एक साथ सपा को जीता दिए ,सलेमपुर में भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ इतनी नाराजगी थी कि सजातीय वोटर ने भी वोट नही किया नजदीकी मुकाबले में हार गए ।


16.बलिया में विधानसभा चुनावों से ब्राह्मण नाराजगी का मुद्दा बना था क्योंकि सदर सीट जोकि ब्राह्मण बाहुल्य है उसको दयाशंकर सिंह ले लिए और सुरेंद्र सिंह की वजह से बेरिया ब्राह्मण उम्मीदवार हार गया तो लोकसभा में भी ब्राह्मण का पहली पसंद सपा के सनातन पांडेय बने ।


17.सपा ने भाजपा को उसके ही सोशल इंजीनियरिंग फार्मूला से मात दिया ,MY उसके साथ था और उन्होंने अतिपिछड़ा,और दलितों (खासकर पासी)का एक मजबूत समीकरण बनाया और भाजपा को मात दी  ,भाजपा अतिआत्मविश्वास मोदी भरोसे में बिना किसी समीकरण के उम्मीदवार देती गयी ,क्षेत्रीय बैलेंस भी खराब किया।


18.सपा के लिये सपा ज्यादा फायदा किया बसपा से आये नेताओ ने ,अम्बेडकर नगर में लाल जी वर्मा ,राम अचल राजभर ,बस्ती राम प्रसाद चौधरी ,कौशाम्बी इंद्रजीत सरोज, सलेमपुर आर एस कुशवाहा और रामशंकर राजभर ये लोग अपने साथ अपनी जातियों का वोट लेके आये साथ मे बसपा के मूल वोटर का वोट भी लाये


19.फिलहाल परिणाम आये हुए अभी 2 दिन भी नही हुआ और भाजपा के मूल वोटर में पछतावा देखने को मिल रहा है कि काश वोट कर देते ,400 पार नारे से शहरी भाजपा मतदाता भी उदासीन होगया था और वोट देने नही निकला.


20.भाजपा को एक मौका मिल गया सही करने का ,जनता ने अपना गुस्सा निकाल दिया  ,सपा को जो वोट शिफ्ट हुआ है वो फ्लोटिंग है वो हमेशा सपा के साथ नही रहने वाला है , सिचुएशनअल वोट है ।



21.मोदी-योगी ,हिंदुत्व सब सही है और लोगो ने इसका नाम पे आपको भरपूर समर्थन दिया है अब तक लेकिन पार्टी और सरकार को भी लोगो की मूल भावना के अनुरूप ही फैसला लेने की जरूरत है ,मोदी के नाम पे किसी को भी लाके प्रयोग करने का समय खत्म हो गया अब उसी को लाओ जिसको जनता का समर्थन है ।


22.जनता में सांसदों के खिलाफ गुस्सा था और वो कभी न कभी निकलना था,अगर सांसद बदले जाते तो भाजपा को 50-55 सीट जीतने में इतनी भी ज्यादा मुश्किल नही होती क्योकि बहुत सारी सीट 50-60k के कम से हारे है ,

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