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मेडिकल बोर्ड की जांच बिना डॉक्टर पर आरोप सिद्ध नहीं, लापरवाही का आरोप अनुचित

 




Bilaspur. डॉक्टरों के खिलाफ चिकित्सा लापरवाही के आरोप में दर्ज एफआईआर को हाईकोर्ट ने रद्द किया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रजनी दुबे की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद पाया कि मामले में बच्चे की स्थिति के बारे में परिवार को बता दिया गया था। साथ ही प्रकरण में मेडिकल बोर्ड या सक्षम अधिकारी से जांच नहीं कराई गई।


उल्लेखनीय है कि सर्जरी के बाद बच्चे की मौत हो गई थी। पिता की शिकायत पर तीन डॉक्टरों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया। इसके खिलाफ आरोपी डॉक्टरों ने हाईकोर्ट में अपील प्रस्तुत की। इसमें कहा गया कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ चिकित्सा लापरवाही का कोई प्राथमिक मामला नहीं बनता है।शिकायतकर्ता के पुत्र को जन्मजात हर्निया के साथ हाइड्रोसील था।उसके माता-पिता की उचित सहमति के तहत सर्जरी की योजना बनाई गई थी और प्रक्रिया और एनेस्थेसिया के परिणाम स्पष्ट रूप से माता-पिता को समझाए गए थे। जबकि शिकायतकर्ता का कहना था कि डॉक्टरों ने बिना उचित योग्यता और साधनों के अपने आर्थिक हित के लिए बच्चे का ऑपरेशन कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोप और लापरवाही सिद्ध न होने पर डॉक्टरों की याचिका स्वीकार कर उनको दोषमुक्त कर दिया।

बालकोनगर थाना इलाके के रहने वाले दिव्यांश के पिता मनोज केंवट की शिकायत पर पुलिस ने डॉक्टर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मनोज ने पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत में कहा कि 6 जनवरी 2021को उसके बेटे दिव्यांश की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उसको इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉ. प्रभात पाणिग्रही ने उसकी जांच की। जांच के बाद 8 जनवरी को डॉक्टर ने उन्हें दिव्यांश को हॉर्निया से पीड़ित होने के बारे में बताया। इसके बाद बच्चे का ऑपरेशन कराने के लिए कहा गया। शिकायत के अनुसार डॉक्टर पाणिग्रही ने जिला अस्पताल में ऑपरेशन की सुविधा नहीं होने की बात कहकर बच्चे को ऑपरेशन के लिए बालकोनगर के निजी आयुष्मान नर्सिंग होम भेज दिया। जिसके बाद  9 जनवरी को दिव्यांश को नर्सिंग होम में भर्ती कर लिया गया और शाम को उसे ऑपरेशन के लिए ले जाया गया। बच्चे के इलाज के दौरान ऑपरेशन थिएटर में डॉ. पाणिग्रही के साथ आयुष्मान नर्सिंग होम की डॉ ज्योति श्रीवास्तव और डॉ प्रतीकधर शर्मा उपस्थित थे। बच्चे को ऑपरेशन के लिए ले जाने के करीब आधे घंटे बाद डॉ. पाणिग्राही ने उन्हें बच्चे की तबीयत बिगड़ने की जानकारी दी. इसके साथ ही डॉक्टर्स ने परिजनों से पूछे बिना बच्चे को कोसाबाड़ी के एक निजी अस्पतल में भर्ती करा दिया। कुछ ही देर बाद वहां मौजूद डॉक्टर ने परिजनों को बच्चे की मौत की जानकारी दी।

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