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कोर्ट के फैसले से मुस्लिम आरक्षण पर राजनीति गर्म, डिप्टी सीएम अरुण साव ने कही बड़ी

 




रायपुर। कोलकाता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के उस फैसले को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने मुस्लिमो को पिछड़ा वर्ग का आरक्षण दिया था। राज्य सरकार ने मुस्लिमों को अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया था। मुस्लिमों को जारी अन्‍य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का प्रमाण पत्र रद्द करने के कलकत्‍ता हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए छत्‍तीगसढ़ के डिप्‍टी सीएम अरुण साव ने इस निर्णय कांग्रेस और इंडी गठबंधन के गाल पर करारा तमाचा बताया है। उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने पिछड़े वर्ग के हक पर डाका डाला, उसे लूटा, पिछड़े वर्ग के लोगो के साथ षडयंत्र किया।पिछड़े वर्ग का आरक्षण छीनकर मुसलमानो को देना असंवैधानिक है। साव ने कहा कि भाजपा पूरी ताकत से ऐसे षड्यंत्र कारियो से लड़कर पिछड़े वर्ग के हको को सुनिश्चित करेगी। कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्णय का हम स्वागत करते है।


बता दें कि बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान ममता बेनर्जी ने राज्‍य में मुस्लिमों को आरक्षण देने की घोषणा की थी। सत्‍ता में आते ही टीएमसी ने मुस्‍लमानों को ओबीसी कोटे से आरक्षण देने का आदेश जारी कर दिया। इस मामले को कलकत्‍ता हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने एक दिन पहले इस मामले में अपना फैसला सुनाया, जिसमें कोर्ट ने 27 वर्गों को जारी ओबीसी का प्रमाण पत्र रद्द करने का आदेश दिया है। लोकसभा चुनाव में पहले ही Husband आरक्षण मुद्दा बना हुआ था। कांग्रेस मुस्‍लमानों को आरक्षण देने का वादा कर रही है। इधर, अब हाईकोर्ट के इस ताजा आदेश ने मुद्दा को फिर गरमा दिया है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार हाईकोर्ट के इस आदेश का छठवें और सातवें चरण के मतदान पर असर पड़ सकता है।

गौर करने वाली बात यह है कि आरक्षण को लेकर सबसे ज्‍यादा हंगामा बंगाल के साथ बिहार और उत्‍तर प्रदेश में होता है। छठवें और सातवें चरण में इन्‍हीं राज्‍यों की सबसे ज्‍यादा सीटों पर वोटिंग होनी है। इन दोनों चरणों में बंगाल की 17, उत्‍तर प्रदेश की 27 और बिहार की 16 सीटों पर मतदान होगा। ऐसे में हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद बीजेपी इसका राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास करेगी। उधर, ममता बनर्जी ने हाईकोर्ट के इस फैसले को मनने के लिए तैयार नहीं हैं। ममता ने साफ शब्‍दों में कहा है कि मुस्‍लमानों का ओबीसी का दर्जा और ओबीसी प्रमाण पत्र रद्द करने के कोर्ट के आदेश से वे सहमत नहीं हैं।






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