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रायपुर कोरबा हसदेव एक्सप्रेस की लेटलतीफी ने महिला यात्रियों को रुलाया, अकेली लेडीज सवारी को घर तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए पिंक आटो का इंतजाम करे प्रशासन

 



बिलासपुर. गर्मी के दिनों में लंबी दूरी की यात्री ट्रेन लेटलतीफी का रिकॉर्ड बना रही हैं। देर से चल रही ट्रेनों को पासिंग देने के चक्कर में जोन की ट्रेनों को भी देर से गंतव्य तक पहुंचा जा रहा है। परेशान यात्रियों ने यह आप रेल प्रशासन पर लगाते हुए छोटी दूरी की ट्रेनों को सही समय पर चलने की मांग की है। 


रायपुर से कोरबा के बीच चलने वाली 18251 हसदेव एक्सप्रेस एक लोकप्रिय ट्रेन है। जिनमें लोग महत्वपूर्ण काम से रायपुर आना-जाना करते हैं। संडे को इस ट्रेन में भीड़ और भी बढ़ जाती है। 26 मई को रायपुर में महिला संगठनों की मीटिंग में बहुत सी महिलाएं रायपुर गई थीं। उन सभी को लौटते समय रायपुर से हसदेव एक्सप्रेस मिली । जिसको रीशेड्यूल करते हुए रेल प्रशासन ने 26 मई की शाम 6 बजे की बजाय रायपुर से ही रात को 9:23 बजे छोड़ा। अपने बच्चों के साथ अकेले इस ट्रेन पर सवार सैकड़ो महिला यात्री परेशान होने लगीं । ऐसा लगा मानो राजधानी के प्लेटफार्म से इस ट्रेन को छोड़ने के बाद कैसे भी करके रायपुर के प्लेटफार्म को खाली करने का उपाय किया गया हो।


 यही कारण रहा कि दक्षिण पूर्व मध्य रेल जोन प्रशासन ने पहले शाहिद रीशेड्यूल की गई इस ट्रेन में यात्रा कर रहे यात्रियों के समय की फिक्र नहीं की। पहले से लेट चल रही इस ट्रेन को टाइम मेकअप करने का कोई भी प्रयास रेलवे की ओर से नहीं किया गया। अपने ही जोन की इस ट्रेन को ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई। पीछे से आ रही ट्रेनों को क्रॉसिंग देने के फेर में यह ट्रेन अपने अंतिम स्टेशन कोरबा रात को 9:45 बजे की बजाय अगले दिन 27 मई को यानि 26 और 27 मई की दरमियानी रात 2:32 बजे पर कोरबा पहुंची। यह ट्रेन भाटापारा स्टेशन पर शाम को 6:53 की जगह रात को 10:27 पर और जोन मुख्यालय बिलासपुर स्टेशन पर शाम को 7:55 बजे की बजाय रात 12:50 पर पहुंची। ट्रेन में सवार महिला यात्री और बच्चे बहुत परेशान हो गए खासकर उन महिलाओं को बहुत परेशानी हुई जो इस ट्रेन में अकेले यात्रा कर रही थी। बिलासपुर स्टेशन से बाहर निकालने के बाद इतनी देर रात में घर जाने के लिए ऑटो की व्यवस्था करना किसी चुनौती से काम नहीं रहा। इसको देखते हुए लोगों ने जिला प्रशासन से स्टेशन से नगर के विभिन्न क्षेत्र तक पिंक सुरक्षित ऑटो की व्यवस्था करने की मांग की है। यही नहीं बिलासपुर से छूटने के बाद भी ट्रेन की चाल में कोई सकारात्मक बदलाव नहीं आया। 


बता दें कि 26 मई रविवार होने के कारण बड़ी संख्या में राजधानी रायपुर जाने वाले महिला यात्री थीं जो अकेले यात्रा कर रही थी इनको अपने गंतव्य स्टेशन पर पहुंचने के बाद देर रात अपने घर पहुंचने के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह ट्रेन चांपा रात में 8:56 की बजाय रात को 2:00 बजे और कोरबा 9:45 की बजाए 2:32 पर पहुंची।

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