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मुफ्त की राजनीति से क्या देश प्रदेश गांव गरीब का होगा भला ! अधर में जा रहा युवाओं का भविष्य? पढ़ें पूरा विश्लेषण

 




Bilaspur. मुफ्त खैरात बांटने की राजनीति से क्या देश प्रदेश गांव गरीब का होगा भला 

बल्कि मुफ्त खोरी से पिछड़ेपन को बढ़ावा आम जनजीवन में बेरोजगारी बढ़ती चली जाएगी

 देश मे दिनों दिन बेरोजगारी बढ़ रही है और आने वाले समय मे जनसंख्या विस्फोट की तरह बेरोजगारी विस्फोट भी हो सकता है। नेतागण अपना फायदा देखने के लिए, पद और पावर में रहने के लिए लोगों को फ्री का आदत डालने लगे जबकि ये होना नहीं था। होना ये था कि बेरोजगारों को रोजगार हेतु प्रेरित करना और उनके लिए योजना लाना जिससे बेरोजगार अपने लिए काम-धंधा देख रोजगार में लग सके।


 रु1 किलो चावल, नमक, चना व आदि देना क्या बेरोजगारों को पंगु नहीं बना रहा है। एक या दो दिन काम कर , मजदूरी के पैसे से राशन लेकर बाकी के 5-6 दिन आराम से व्यतीत करना। एक दिन अधिक कार्य करने पर मिलने वाला मजदूरी देसी शराब या अंग्रेजी शराब के लिए काफी है। वैसे भी महुआ, सल्फी गांवों में बहुत ही कम पैसों में उपलब्ध होते हैं और आजकल यह शहरों में भी डिमांड पर उपलब्ध हो रहे हैं। 

केंद्र सरकार राज्य सरकार की मुक्त बांटने की योजना कालाबाजारी जमाखोरी ऐसे लोगों को मिलता है बढ़ावा योजना के नाम पर₹100 यदि निकलता है तो वह हितग्राही या गांव तक पहुंच कर पहुंचने महज ₹10 ही उनको मिल पाता है बाकी का 90% बंदरबांट कर दिया जाता है 

सरकार को चाहिये कि शिक्षा और मेडिकल को निःशुल्क करे और बाकी के लिए पैसे ले। जबकि हो तो उल्टा रहा है। शिक्षा और मेडिकल ट्रीटमेंट में लोगों के घर,जमीन, मकान, ज़ेवर तक बिक जा रहे हैं। कोई जरूरी नहीं कि सर्वस्व भेंट चढ़ाने के बावजूद कितने लोगों को जीवन दान मिला! 


इस महंगाई के कारण सबसे ज्यादा पीड़ित मध्यम वर्ग है जो ना तो बाएं करवट ले सकता है और न दांए करवट लेकिन सीधा लेटकर महंगाई की मार झेलता रहता है और उफ्फ आफ्फ ही करता रहता है और इसी तरह ज़िंदगी व्यतीत हो जाती है। 

कभी सामाज के लोग या सामाजिक लोग इस हेतु न तो बात करते हैं और न ही अपनी बात को सही मंच पर रखते हैं या रख नहीं पाते हैं। 


आज फ्री के विभिन्न योजनाओं को यदि बन्द कर दिया जाए तो राजनीतिक दलों की राजनीति चौराहे पर खड़े नजर आएगी पार्टी को मेजोरिटी मिलना मुश्किल हो जाएगा क्यों कि हमने लोगों को फ्री (मुफ्त) की आदत जो लगा दी है। यदि हटाया तो पावर में नहीं आ पाएंगे और यदि जारी रखा तो अन्य पार्टियां नहले पे दहला मारेगी और जनता कंफ्यूज होगी और पता नहीं किस चिन्ह पर मतदान करे। 

 राजनीति चमकाने मुफ्त खोरी कहीं ना कहीं लोगों को पंगु बनाकर जीवन स्तर प्रभावित कर रही।

इसी तरह रिबेट, छूट व अन्य तरह का छूट बिज़नेस मैन उठाते हैं यानी इसे हम कुछ हद तक फ्री में मिलने वाले लाभ का भी संज्ञा दे सकते हैं जिससे वे दिनों दिन बहुत ही प्रगति करते जाते हैं पर बेरोजगारों को उन प्रगति से किसी तरह का रोजगार नहीं मिलता है जो बहुत ही बड़ा सवाल है।

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