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ब्रह्मलीन बाबा भगत राम साहेब जी का 60 वां अवतरण"दिवस हर्षो ऊलास के साथ मनाया गया

 





बाबा आनंद राम दरबार चक्करभाटा के ब्रह्मलीन बाबा भगत राम साहब जी का" अवतरण दिवस हर्षो उल्लास के साथ मनाया गया कार्यक्रम की शुरुआत रात्रि 9:00 बजे बाबा आनंद राम ब्रह्मलीन बाबा भगत राम साहब जी के मूर्ति पर फूलों की माला पहनकर दीप प्रज्वलित करके की गई इस अवसर पर बाबा आनंद राम दरबार कालीबाड़ी रायपुर के भाई साहब सांई सुदामा भैया जी के द्वारा बाबा भगतराम साहिब जी के जीवन के बारे में प्रकाश डाला गया ।



सांई श्री कृष्ण दास जी ने भी रामायण का एक प्रसंग सुनाया उन्होंने बताया कि जब 14 वर्ष वनवास काटकर भगवान श्री रामचंद्र जी वापस अयोध्या लौटे थे तो पूरी अयोध्या नगरी जगमगा उठी थी चारों तरफ दीपक जल रहे थे दिवाली मनाई जा रही थी खुशियां मनाई जा रही थी तब रामचंद्र जी के ससुर जी राजा जनक जी ने एक संदेश भेजा की 14 वर्ष बाद आप आए हैं तो आपसे निवेदन है कि आप सह परिवार व मित्रजन व वानर सेना के साथ जनकपुर में भी आए ताकि यहां पर भी लोग खुशियां मनाए और दिवाली मना सके जब यह संदेश लेकर दूत अयोध्या पहुंचे दरबार में संदेश रामचंद्र जी ने जामवंत जी को दिया ओर पढने को कहा 



संदेश पढ़ रहे थे तब आखरी लाइन जब पढी कि सभी वानरों को भी लेकर आए तब रामचंद्र जी सोच में पड़ गए तब उन्होंने कहा कि इसमें वरिष्ठ वानरों लिखा है आप सबको नहीं चलना है आप सबको यही रहना है और सभी वानर उदास हो गए और कहने लगे हां प्रभु हमको आप कहां ले जाएंगे हमको तो बस रावण से लड़ाई लड़ने के लिए आप लेकर जाएंगे अपने ससुराल हमको लेकर नहीं जा रहे हैं तब जामंवत जी ने सभी वानरों को देखा उदास हो गए थे तब उन्होंने कहा प्रभु आप चिंता ना करें उनकी गारंटी में लेता हूं यह कुछ नहीं करेंगे शांति से चलेंगे और शांति से रहेंगे रामचंद्र जी ने कहा जामंवत जी आप इनको नहीं जानते हैं यह वहां जाकर उत्पाद मचाएंगे तो अच्छा नहीं लगेगा अगर आप गारंटी लेते हैं तो ठीक है एक बार मुझे थोड़ा दिखाइए कैसे सभी वानर आपका कहना मानते हैं तब जामंवत ने इशारा करके दिखाया उन्होंने एक उंगली उठाई तो सभी उठ गए एक उंगली नीचे की तो सभी बैठ गए रामचंद्र जी ने कहा ठीक है सभी चलिए सभी वानर खुश हो गए सभी नए-नए कपड़े वस्त्र सिलवाने लगे अपने लिए और ढोल बाजे के साथ लव लशकर के साथ भगवान रामचंद्र जी अयोध्या से अपने ससुराल जनकपुर पहुंचे शानदार स्वागत किया गया और आव भगत की गई अब जैसे अंदर पहुंचे सभी लोग आराम से बैठे तब जमांवत भी जैसे बैठे तो उनको देखकर सभी वानर भी एक साथ बैठे जोर से आवाज आई ऐसा लगा जैसे जनकपुर की धरती हिल गई हो,राम जी ने देखा चलो ठीक है कोई बात नहीं सभी के लिए खाना परोसा गया सभी वानर को पहली बार थाली में ऐसे 56 भोग खाने को मिले थे सभी देखकर हैरान हो गए और खुश भी हो रहे थे की पहली दफा थाली में हमको छप्पन भोग खाने को मिल रहा है यह प्रभु की कृपा है प्रभु ने खाना शुरू किया और कहा आप भी सब खाइये तो सभी जामंवत को देखने लगे जब जामवंत जी ने जैसे ही एक रोटी उठाई सभी वानरों ने भी एक रोटी उठाई और सब खाने लगे खाना खाने के बाद जामवंत जी ने डकार मारी तो यह देखकर सभी वानरों ने भी डकार मारी 

 बाद में सभी के लिए फल वगेरह लेकर आए, जैसे ही सभी लोग फल खाने लगे जामवंत ने एक आम उठाया जैसे आम को पकड़ा उसकी ताकत से आम पचक गया गुठली ऊपर नीकल गई सभी वानरों ने देखा कि हमें भी आम ऐसे ही खाना है तो सभी ने आम को जोर से दबाया और गुठली ऊपर निकल गई जामवंत जी को बड़ा गुस्सा आया कि यह गुठली कैसे‌ मेरे हाथ से निकल गई जामवंत उठकर गुठली को पकड़ने लगे सभी वानरो ने भी जामवंत को देखकर आम को जोर से पकडा और गुठली नीकल गई फिर उठकर पकडने लगे इतनी भीड़ बढ़ गई धक्का मुकी होने लगी राम जी यह देखकर मन ही मन दुखी हो रहे थे कि वानरों ने क्या कर दिया अपने हाथों से अपना चेहरा छुपाने लगे ओर सोचने लगे कि बेज्जती करवा दी वानरों ने जामवंत जी ने राम जी को देखा वह हाथ जोड़कर माफी मांगने लगे की प्रभु यह मेरी गलती है और दूसरी तरफ राजा जनक यह नजारा देखकर मुस्कुराने लगे कि ऐसा नजारा एसी मस्ती ऐसी हंसी की टोली तो रामचंद्र जी के राज्य में ही हो सकती है और बहुत खुश हो रहे थे उठकर राम जी के पास गए और कहा आप अपना चेहरा मत छुपाइए कोई बात नहीं यह तो बहुत अच्छा नजारा है मुझे बहुत खुशी हो रही है यह सब देखकर आप चिंता ना करें ऐसी मस्ती ऐसा प्यार ऐसा नजारा तो राम राज्य में ही संभव है इंसान हो या जानवर ऐसा प्रेम तो भगवान दे सकते हैं भगवान जो लीलाएं करते हैं वह किसके लिए करते हैं वह क्यों करते हैं भगवान सिर्फ अपने भक्तों की खुशी के लिए प्रेम के लिए लीलाएं करते हैं उनके उद्धार के लिए लीलाएं करते हैं एक बार विभीषण ने हनुमान जी से पूछा आपको प्रभु रामचंद्र जी जीतना प्रेम करते हैं क्या उतना मुझे भी करेंगे कयोकि में रावण का भाई हूं यह सोचकर हनुमान जी आश्चर्यचकित रह गए और कहा आज तक मैंने कभी सोचा नहीं था कि कोई ऐसा प्रश्न मुझसे पूछेगा हनुमान जी ने प्यारा सुंदर सा जवाब दिया और कहा विभीषण जी जब प्रभु मुझ जैसे वानर से प्रेम करते हैं तो आप तो फिर इंसान हो आपको तो मुझसे ज्यादा प्रेम करेंगे यह बात हनुमान जी की सुनकर विभीषण बहुत प्रसन्न हुए और तसल्ली हो गई की रामचंद्र जी मुझे भी उतना ही प्रेम देंगे जितना हनुमान जी को देते हैं और फिर वह रामचंद्र जी के पास पहुंचे इस प्रसंग का तात्पर्य है कि भगवान इंसान या जानवर नहीं देखते है भगवान तो प्रेम देखते है भाव देखते है भगवान की नजर में सब एक समान है जीव हो जंतु हो इंसान हो जानवर हो कोई छोटा बड़ा नहीं है

गोविंद भाई के द्वारा भगवान रामचंद्र जी का भक्ति भरा सुंदर भजन ,,राम जी की निकली सवारी,,गाया गया इसे सुनकर उपस्थित भक्तजन भाव विभोर हो गए सांई कृष्ण दास जी के द्वारा भी कई भक्ति भरे भजन गाए जीसे सुनकर भक्त झूम उठे कार्यक्रम के आखिर में पूज्य माता साहिब,सांई कृष्ण दास जी,सुदामा भैया, और बाबा आनंदराम दरबार सेवा समिति, के संग केक काटा व साध संगत को वितरण किया आरती की गई, अरदास की गई ,प्रसाद वितरण किया गया ,आए हुए सभी साध संगत के लिए आम भंडारे का आयोजन किया गया बड़ी संख्या में भक्त जनों ने भंडारा प्रसाद ग्रहण किया आज के इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में भक्तजन बिलासपुर, चक्कर भाटा, बिल्हा, कोरबा, रायपुर, भिलाई,वह आसपास के शहरों से पहुंचे थे आज के इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में बाबा आनंद राम सेवा समिति बिलासपुर चकरभाठा के सभी सेवादारियों का विशेष सहयोग रहा।




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