धूम-धाम से मनाया गया गुरु नानक देव जी का 554 वां प्रकाश उत्सव, अमृतवाणी में सुनाए गए गुरु नानक देव जी के कई प्रसंग, भक्ति भरे भजन सुनकर झूम उठे भक्तजन
Amar Agarwal Birthday Poster

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धूम-धाम से मनाया गया गुरु नानक देव जी का 554 वां प्रकाश उत्सव, अमृतवाणी में सुनाए गए गुरु नानक देव जी के कई प्रसंग, भक्ति भरे भजन सुनकर झूम उठे भक्तजन

 




गुरु नानक देव जी का  554  वां प्रकाश उत्सव पूज्य सिंधी  पंचायत आजाद नगर में  बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया 3 दिसंबर को कार्यक्रम की शुरुआत 12:00 बजे हुई भाई साहब अमर रुपानी जी के द्वारा  सत्संग से हुई भाई साहब अमर रुपानी ने अपने अमृतवाणी में गुरु नानक देव जी के कई प्रसंग सुनाए जिसमें एक प्रसंग था एक दिन  गुरु नानक देव जी वह उनके सेवादार भाई  मर्दाना एवं भाई बालो दोनों के साथ दूसरे शहर जाते हैं रास्ते में  जंगल में भाई   मर्दाना  को भूख लगती है और  कोई घर दिखाई नहीं देता है ना कुछ खाने का फल वगैरा दिखाई देता है तो वह गुरु नानक देव  जी को कहते हैं कि मुझे भूख लगी है पेट में बहुत दर्द दे रहा है कुछ खाने को चाहिए गुरु जी कहते हैं सामने एक झाड है उसमें से जो वह फल लगे हैं उसे तुम तोड़ लो पर खाने से पहले तुम यह गुरु की पौड़ी पढ़ना तब ईसे खाना और जितना खाना हो एक ही बार खाना इसे रास्ते में और खाने के लिए लेकर मत चलना ठीक है हाँ ठीक है 





झाड़ के जो कड़वे फल रहते हैं उन्हें तोड़ता है और गुरु की पौड़ी पढ़कर जब खाता है तो वह अमृत मीठे तुल्य बन जाते हैं भाई मरदाना खाकर अपना पूरा पेट भर लेता है फिर सोचता है रास्ते में कहीं फिर भूख लगेगी तो क्या करूंगा इसलिए कुछ तोड़ के जेब में छुपा के रख लेता हूं वह और फल तोड़ के जेब में छुपा देता है और जब गुरु पूछते हैं खा लिया पेट भर गया तो कहता है मैंने खा लिया  पेट भर गया और कुछ थोड़ी रखा है



मर्दाना कहता है गुरुजी   नहीं रखा हूं गुरु से झूठ बोलता है और आगे चलते हैं दो-तीन घंटा बीत जाता है चलते-चलते तो फिर उसे भूख लगने लगती है और  मर्दाना सोचता है अगर मैं गुरु के सामने निकल कर खाऊंगा तो कहेंगे कि मैंने मना किया था फिर भी तुमने झूठ बोलकर  काम किए हो नाराज हो जाएंगे तो वह जानबूझकर धीरे-धीरे चलने लगता है ताकि गुरु आगे निकल जाए और मैं पीछे रहकर जब से फल निकाल कर खाऊं  जब वह एक फल निकलता है खाता है तो खट्टा रहता है फेंक देता है दूसरा खाता है वह करवा लगता है फेंक देता है जब तीसरा खाता है तो वह जहर होता है और सीधा वहीं गिर जाता है मुंह से झाग निकलने लगती है जब गुरु का दूसरा सीख बाला पीछे मुड़कर देखता  है तो मर्दाना गिर पड़ा है और गुरु को बताता है फिर दोनों पीछे जाकर देखते हैं     मर्दाना के मुंह से झाग निकल रही है तो मर्दाना कहता है गुरुदेव जी यह हमारा भाई है आपका सिख है सेवादार है इसे बचा लीजिए तब गुरु मर्दाना के ऊपर हाथ फेरते हैं मर्दाना उठ खड़ा होता है और गुरु से हाथ जोड़कर अपने झूठ बोलने के लिए क्षमा मांगता है इस प्रसंग का तात्पर्य यह है  कि गुरु की बात मानोगे तो जहर भी अमृत बन जाता है और नहीं मानोगे तो वह अमृत भी जहर बन जाएगा जो जो गुरु की बात मानकर उसके बताएं मार्ग पर चलेगा जीवन में वही सुखी रहेगा



अपनी अमृतवाणी में कई भक्ति भरे भजन गाए जिसे सुनकर भक्तजन झूम उठे कार्यक्रम के आखिर में गुरु साहब को  भोग लगाया गया आरती की गई अरदास की गई पल्लो पाया गया गुरु का हुक्म नाम पढ़ा गया प्रसाद वितरण किया गया इस अवसर पर  संगत के लिए गुरु का प्रसाद रूपी अटूट लंगर आम भंडारा भी बरताया  गया





 इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने   गुरु का  अटूट लंगर खाया आज के इस पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में पूज्य सिंधी पंचायत आजाद नगर के अध्यक्ष भाई बृजलाल नागदेव व अन्य पदाधिकारी गण प्रताप नागदेव सतीश लाल नानकराम नागदेव गोविंद भाई अशोक टेकचंदानी रमेश टेकचंदानी जय वलेचा घनश्याम मेघानी  रमेश देवानी चेतन पंजवानी संतोष नागदेव गोविन्द तोलानी उमेश लाल अशोक वाधवानी बलराम नागदेव   व कई सदस्यों का विशेष सहयोग रहा इनमें महिला विंग की सदस्य भी शामिल रही




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