बस्तर .जमीन के रिकॉर्ड में वर्षों से मृत व्यक्तियों के नाम दर्ज रहने की समस्या से जूझ रहे हजारों परिवारों के लिए राहत की खबर है। बस्तर जिले में प्रशासन ने एक विशेष अभियान चलाकर पिछले चार वर्षों से लंबित फौती नामांतरण मामलों का तेजी से निपटारा शुरू किया है।
इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन लोगों का निधन हो चुका है, उनकी जमीन का सही नामांतरण उनके कानूनी वारिसों के नाम पर समय पर दर्ज हो सके, ताकि परिवारों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और जमीन से जुड़े कार्यों में कोई बाधा न आए।
गांव-स्तर से शुरू हुई प्रक्रिया
अभियान की शुरुआत गांव स्तर से की गई, जिसमें ग्राम सचिवों ने पिछले चार वर्षों में मृत्यु को प्राप्त व्यक्तियों की सूची तैयार की। इसके बाद पटवारियों ने राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर ऐसे मामलों की पहचान की, जिनमें फौती नामांतरण की आवश्यकता थी।
स्थानीय स्तर पर कोटवारों ने जानकारी का सत्यापन किया, जबकि तहसीलदारों ने पूरे अभियान की निगरानी करते हुए यह सुनिश्चित किया कि सभी मामलों का निपटारा पारदर्शिता और नियमों के अनुसार हो।
प्रशासन का उद्देश्य: सरल और पारदर्शी रिकॉर्ड व्यवस्था
प्रशासन का कहना है कि इस पहल से न केवल लंबित मामलों का समाधान होगा, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड भी अद्यतन और त्रुटिरहित बनेंगे। इससे भविष्य में जमीन संबंधी विवादों और प्रक्रियात्मक देरी में कमी आने की उम्मीद है।
इस अभियान से हजारों परिवारों को राहत मिलने की संभावना है, जो लंबे समय से नामांतरण संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे थे।

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