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2024 का लोकसभा चुनाव सम्पन्न हुआ, परिणाम हम सबके सामने, लेकिन अब बात उत्तरप्रदेश की.......

 






1.भाजपा का टिकट वितरण इस चुनाव में सबसे खराब रहा है जिसकी वजह से चुनाव मोदी-योगी vs भाजपा उम्मीदवार पे केंद्रित हो गया 


2.हर चुनाव में भाजपा जातियों के क्षेत्रीय समीकरण के अनुसार टिकट देती है लेकिन अबकी भूल हुई ,गाजियाबाद से राजपूत का टिकट काट कर बनिया को दिया गया जबकि मेरठ से भी बनिया उम्मीदवार दे दिया गया जिसकी वजह से क्षेत्रीय बैलेंस खराब हुआ और राजपूत की नाराजगी का मुद्दा उठा


3.राजपूत के मुद्दे पे लीपापोती करने के लिए फ़िरोज़ाबाद के साथ मैनपुरी से भी भाजपा ने ठाकुर उम्मीदवार दे दिया जबकि 1 सीट पे भाजपा को पिछड़ा शाक्य/यादव उम्मीदवार देना ,जिसकी वजह से उस क्षेत्र का भी बैलेंस खराब हुआ और फ़िरोज़ाबाद जैसी सीट पे भाजपा को मुश्किलों का सामना करना पड़ा


4.भाजपा ने बस्ती ,देवीपाटन ,अयोध्या मंडल से एक भी कुर्मी उम्मीदवार नही दिया जबकि ये क्षेत्र कुर्मी बाहुल्य है जिसकी वजह से ये क्षेत्र का भी बैलेंस खराब हुआ ,बस्ती जैसे सीट जहाँ स्थानीय सांसद के खिलाफ नाराजगी थी उसपे एक कुर्मी उम्मीदवार देके उसके बैलेंस को बनाया जा सकता था ।


5.कौशाम्बी और प्रतापगढ़ जेसी लोकसभा जो आसानी से जीती जा सकती है वो सिर्फ भाजपा उम्मीदवार की वजह से हार गई ,पिछली बार प्रतापगढ़ में संगम लाल को एकलौता पिछड़ा उम्मीदवार होने का फायदा मिला जबकि अबकी सपा से कुर्मी उम्मीदवार है ,और सीट कुर्मी प्रभावित है ,साथ मे प्रमोद तिवारी का साथ।सपा लगातार समीकरण के हिसाब से अपने प्रत्याशी बदलती रही 


6.कौशाम्बी लोकसभा जहाँ सांसद के खिलाफ नाराजगी थी और पासी बाहुल्य सीट है ,इस सीट पे भाजपा ने सांसद को फिर से टिकट दिया जिसकी वजह से ये सीट भी बीजेपी हार गई .राजा भैया ने अबकी उम्मीदवार नही दिया और उनके 1.5 लाख वोटर का रुख सांसद के खिलाफ हो गया 


7.अगर भाजपा ये सीट से किसी पासी उम्मीदवार को देती तो भाजपा आसानी से सीट जीत सकती थी ,सोनकर की वजह से राजा भैया ने भी समर्थन नही दिया क्योकि उनसे उनकी पुरानी अदावत है ,तो ये चुनाव आसानी से 75-76 सीट जीतने लायक था लेकिन भाजपा उम्मीदवारों की वजह से आसानी से जीती सीट मुश्किल में आ गयी।


8.रायबरेली जैसी सीट जहाँ से आपने दिनेश सिंह को उम्मीदवार बनाया जिनके खिलाफ भाजपा के विधायक/पूर्व विधायक सभी थे ,कोई एक स्थानीय नेता नही था जो उनके साथ मंच साझा कर सके ,अमित शाह जी को मनोज पांडेय के घर जाना पड़ा समर्थन के लिये तो टिकट वितरण में भाजपा से बहुत गलतियां हुई है ।


9.चुनाव पूरी तरह से मोदी-योगी के पक्ष में ही था और विपक्ष की कोई खास हवा नही थी लेकिन स्थानीय सांसदों के खिलाफ नाराजगी थी इससे इनकार नही किया जा सकता है जोकि परिणाम में देखने को मिला,फिलहाल को संगठन को ऐसे ब्लंडर करने से बचना होगा,खासकर क्षेत्रीय और जातीय समीकरण से छेड़छाड़ न करे


10.वोटिंग पैटर्न देखे तो भाजपा के गठबंधन पार्टनर में सिर्फ ओम प्रकाश राजभर थे जिनकी जातियों का वोट पूरी तरह भाजपा को ट्रांसफर हुआ है बाकी दूसरे गठबंधन पार्टनर खासकर अपना दल पे भाजपा को विचार करना होगा क्योकि उनको भाजपा से तो फायदा है लेकिन भाजपा को उनसे बहुत ज्यादा लाभ नही हो रहा है


11.बीजेपी ने ये गलतियां सिर्फ उत्तरप्रदेश में नहीं बल्कि, महाराष्ट्र, बंगाल और राजस्थान में भी की. इन राज्यों में भी BJP ने ख़राब टिकट दिए. महाराष्ट्र में कई जगह टिकट देने में बीजेपी और उसके साथी दलों में अंडरस्टैंडिंग की कमी नजर आई. बंगाल और राजस्थान में भी समझ से परे टिकट दिए गए और लोकल कैडर को पुरे तरीके से इग्नोर किया गया. जिसके कारण जहां बीजेपी खुद के दम पर 320 से अधिक सीटें ला सकती थी वहीँ वो 240 पर सिमट कर रह गई  




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